गुरुग्राम। मानसून की कुछ बारिशों ने ही प्रदेश की वित्तीय राजधानी कहे जाने वाले गुरुग्राम शहर के बुनियादी ढांचे और ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। शहर की सडक़ों से लेकर रिहायशी इलाकों तक पानी भर जाने से पूरा गुरुग्राम जलमग्न नजऱ आ रहा है। जगह-जगह लगे लंबे ट्रैफिक जाम और जलभराव के कारण आम जनमानस को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष मनीष यादव का कहना है कि प्रदेश में भाजपा के लंबे शासनकाल को 10-15 साल से अधिक का समय बीत चुका है। इतने वर्षों में तथाकथित विकास तो कागजों और रैलियों के दावों में बहुत बड़ा हो गया, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता बड़ी-बड़ी रैलियों और मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि 15 साल के शासनकाल के बाद भी एक आधुनिक शहर से केवल बारिश के पानी की निकासी का पुख्ता इंतजाम नहीं हो सका, तो सरकार से और क्या उम्मीद की जा सकती है? मनीष यादव ने कहा कि गुडग़ांव को साइबर सिटी और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे वाले शहर के रूप में प्रचारित किया जाता है। लेकिन थोड़ी सी बारिश होते ही हाईवे, मुख्य सडक़ें और गलियां जलमग्न हो जाती हैं। नाले जाम हैं और ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आती है। शहर की इस बदहाली ने न केवल दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों का जीना दूभर कर दिया है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी बुरा असर डाला है। पूरे शहर के अस्त-व्यस्त होने के बाद सपा नेता ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया है कि केवल कागजी दावों और चुनावी भाषणों के बजाय धरातल पर ठोस काम किया जाए। जलभराव के लिए जिम्मेदार विभागों और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि बारिश आते ही गुरुग्राम को डूबने से बचाया जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।
15 साल में विकास तो बड़ा हो गया, लेकिन जलनिकासी का सिस्टम आज भी है लाचार : मनीष यादव

