गुरुग्राम। धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज द्वारा जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर की रजत जयंती के उपलक्ष्य में समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मातृशक्ति के त्याग, तपस्या और समर्पण का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। गत 10 से अधिक वर्षों से अध्यात्म और ज्ञान मार्ग पर निरंतर अग्रसर 300 माताओं को भावपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया। वरिष्ठ राजयोगिनी बहनों और प्रबुद्ध जनों ने माना कि समाज और राष्ट्र के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक नवनिर्माण की वास्तविक कर्णधार मातृशक्ति ही है। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा ने कहा कि मां का दर्जा संसार में सर्वोपरि है। जब हम परमात्मा की स्तुति करते हैं, तो भी तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो कहकर पहले माता के रूप का स्मरण किया जाता है। संस्थान के इतिहास में दादियों की दृढ़ता और सहनशक्ति का अद्भुत उदाहरण है। यह उसी मातृशक्ति का कमाल है कि आज यह आध्यात्मिक यज्ञ विश्व पटल पर इतनी सम्पन्नता के साथ सेवा कर रहा है। राजयोगिनी बीके शुक्ला ने कहा कि माता को समाज का प्रथम गुरु माना गया है। उनके भीतर समाहित वात्सल्य, धैर्य और सहनशीलता जैसे अलौकिक गुणों के कारण स्वयं भगवान भी उनकी महिमा और वंदना करते हैं। बीके मोहन सिंघल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ दुनिया का एकमात्र ऐसा विशाल संगठन है, जिसका नेतृत्व पूर्णत: माताओं और बहनों के दूरदर्शी और सशक्त हाथों में है। बीके चक्रधारी ने कहा कि माताओं की निस्वार्थ सेवा और तपस्या के बल पर ही संस्था आज सफलताओं की बुलंदियों को छू रही है। ईश्वर ने माताओं को शिवशक्ति का स्वरूप बनाकर समाज कल्याण का दायित्व सौंपा है। आयोजन को डॉ. विलियम सेल्वामूर्ति, बीके गीता, बीके रुक्मणी, बीके विजय, बीके राजकुमारी, बीके सुनीता आदि ने संबोधित किया। ओआरसी परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। गायक बीके गौरव ने माताओं के सम्मान में भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। कलाकारों ने विशेष नाटिका के माध्यम से माताओं के त्यागमय जीवन चरित्र और आध्यात्मिक यात्रा को बेहद जीवंत रूप में मंचित किया।
ओआरसी के रजत जयंती वर्ष में मातृशक्ति का किया गया सम्मान

