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शहर में हादसों को दावत दे रहे सैकड़ों सूखे पेड़, नगर निगम की लापरवाही से मंडरा रहा है खतरा

गुरुग्राम। शहर की मुख्य सडक़ों, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक पार्कों में इस समय सैकड़ों सूखे पेड़ काल बनकर खड़े हैं। मौसम के बदलते मिजाज और आए दिन आ रहे आंधी-तूफान के बीच ये मृत पेड़ कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। इन पेड़ों के गिरने का खतरा हर वक्त बना रहता है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और सडक़ों पर पार्क होने वाले वाहनों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर सोया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम और वन विभाग के पास इन सूखे पेड़ों की कोई सटीक गिनती तक नहीं है। रोजाना हजारों लोग इन रास्तों से गुजरते हैं। तेज़ हवा चलते ही सूखी टहनियां टूटकर गिरने लगती हैं, जिससे कई दोपहिया वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं। नागरिकों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या जानमाल के नुकसान का इंतजार कर रहा है? सामाजिक संस्था स्वास्तिक फाउण्डेशन के राज सैनी बिसरवाल का कहना है कि यदि समय रहते इन सूखे पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से हटा दिया जाए, तो इसके दोहरे फायदे होंगे। इन पेड़ों से मिलने वाली टनों सूखी लकड़ी को कई उपयोगी कार्यों में प्रयोग किया सकता है। सूखे पेड़ों को हटाने के तुरंत बाद उसी स्थान पर नए और छायादार पौधे लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आज कदम उठाए गए, तो आने वाले समय में शहर को भरपूर ऑक्सीजन, हरियाली और राहगीरों को सुकून भरी छांव मिल सकेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खतरे को भांपते हुए कब तक नींद से जागता है और ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाता है।