गुरुग्राम। धाम्रिक संस्था ब्रह्माकुमारी के आधार स्तंभ एवं पूर्व महासचिव राजयोगी बीके बृजमोहन की पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओआरसी परिसर में स्नेहांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से सदस्य शामिल हुए। बीके बृजमोहन के उत्कृष्ट आध्यात्मिक लेखों के संकलन पर आधारित दो नई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। रक्षा वैज्ञानिक डॉ. विलियम सेल्वामूर्ति ने कहा कि बीके बृजमोहन का व्यक्तित्व अत्यंत दूरदर्शी और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत था। उनके विचारों और जीवनशैली का समाज पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि केवल आध्यात्मिक सशक्तिकरण के माध्यम से ही भारत पुन: विश्व गुरु के पद पर आसीन हो सकता है और ब्रह्माकुमारीज़ सनातन संस्कृति की पुनस्र्थापना के इस महायज्ञ में अभूतपूर्व भूमिका निभा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता शाही कुमार ने बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की पृष्ठभूमि होने के कारण वे विधिक और प्रशासनिक बारीकियों को बहुत गहराई से समझते थे। संस्थान के समक्ष आने वाले कई जटिल मामलों का वे क्षण भर में सहज और सटीक समाधान खोज लेते थे। उनकी सोच बेहद पारदर्शी और दूरगामी थी। बीके आशा ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि छात्र जीवन में सीए की पढ़ाई के दौरान ही बीके बृजमोहन का झुकाव अध्यात्म की ओर हुआ और उन्होंने अपना पूरा जीवन ईश्वरीय सेवा में समर्पित कर दिया। मासिक पत्रिका प्योरिटी के प्रधान संपादक के रूप में उनकी सशक्त लेखनी ने लाखों आत्माओं को सही राह दिखाई। वे एक पारखी नेतृत्वकर्ता थे, जो हर व्यक्ति की क्षमता को पहचान कर उन्हें सही कार्य की जिम्मेदारी सौंपते थे। आयोजन में राजयोगिनी बीके शुक्ला, बीके चक्रधारी, पुष्पा, मोहन सिंघल, विजय, रुक्मिणी, भारत भूषण, सुरेश गुप्ता, डॉ. रूप सिंह एवं आनंद ने भी विचार व्यक्त किए। गायक बृजेश मिश्रा और चाँद बजाज ने भजनों व गीतों के माध्यम से उपस्थित पूरी सभा को भावविभोर कर दिया।
ब्रह्मकुमारीज के राजयोगी बीके बृजमोहन की पुण्यतिथि पर स्नेहांजलि सभा का किया आयोजन

