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सेवा केंद्र ने मनाया मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का 61वां स्मृति दिवस

गुरुग्राम। सैक्टर 4 स्थित ब्रह्माकुमारीज के सेवा केंद्र परिसर में प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का 61वाँ पुण्य स्मृति दिवस मनाया गया, जिसमें सेवा केंद्र की पदाधिकारी, सदस्य व गणमान्य नागरिक शामिल हुए। सेवा केंद्र की प्रभारी राजयोगिनी बीके सुदेश ने कहा कि 24 जून 1965 को मातेश्वरी ने मात्र 41 वर्ष की अल्पायु में अपनी कठिन साधना पूर्ण कर पार्थिव शरीर का त्याग किया था। उन्होंने त्याग, तपस्या और पवित्रता का ऐसा अद्वितीय आदर्श स्थापित किया, जो आज भी असंख्य लोगों के जीवन को आलोकित कर रहा है। उनका कहना है कि जब भारतीय समाज में महिलाएं अशिक्षा, पर्दा प्रथा और रूढि़वादिता की बेडिय़ों में जकड़ी हुई थीं, तब उन्होंने महिलाओं के संगठन का कुशल नेतृत्व किया। उन्होंने आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियों और स्वास्थ्य संबंधी विपरीत परिस्थितियों के बीच भी संगठन को हमेशा एकजुट रखा। बीके सुदेश ने आह्वान किया कि आज के दौर में बच्चों और युवाओं को श्रेष्ठ संस्कारों से जोडऩा बेहद जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज़ केंद्रों पर आज भी मम्मा के पदचिह्नों पर चलते हुए माताओं और कन्याओं को सादगी, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और आत्मिक सशक्तिकरण की शिक्षा दी जा रही है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में सदस्यों ने विश्व शांति, मानव कल्याण और आत्मिक जागृति के लिए सामूहिक राजयोग मेडिटेशन किया। इस अवसर पर बीके सोनिया, बीके स्नेह, बीके कोमल सहित साधक डा. सुधा, बीना, महावीर, गिरीश, मनीष, राजाराम आदि शामिल रहे।