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श्रद्धाभाव के साथ आर्य समाज ने मनाई गुरु विरजानंद दंडी की पुण्यतिथि

गुरुग्राम। आर्य केंद्रीय सभा गुरुग्राम एवं आर्य समाज सेक्टर-7 एक्सटेंशन के संयुक्त तत्वावधान में वेदों के महान विद्वान और स्वामी दयानंद सरस्वती के गुरु स्वामी विरजानंद दंडी की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। आयोजित विशेष यज्ञ और भजन-संध्या में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भाग लिया और महान संत को नमन किया और यज्ञ में आहुति दी। भजन गायक पंडित देव आर्य ने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति, आर्य समाज के आदर्शों और स्वामी विरजानंद के जीवन चरित्र से अवगत कराते हुए मंत्रमुग्ध कर दिया। परोपकारिणी सभा अजमेर के मंत्री कन्हैया लाल आर्य ने बताया कि वर्ष 1860 में सत्य की खोज करते हुए स्वामी दयानंद मथुरा में एक छोटी सी कुटिया में रहने वाले स्वामी विरजानंद के पास पहुंचे थे। गुरु विरजानंद से तीन वर्ष तक कठोर अध्ययन और शिक्षा पूरी करने के बाद जब गुरु दक्षिणा का अवसर आया, तो उन्होंने स्वामी दयानंद से कहा था कि जाओ, वेदों के सत्य ज्ञान का प्रचार करो, पाखंड और अंधविश्वास को मिटाओ। आर्य केंद्रीय सभा के पूर्व प्रधान अशोक आर्य ने कहा कि गुरु विरजानंद के इन्हीं आदेशों और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए स्वामी दयानंद ने वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी। प्रधान धर्मेंद्र बजाज और मंत्री विकास रेलन ने कहा कि प्रज्ञाचक्षु होते हुए भी गुरु विरजानंद ने पूरे भारत को ज्ञान की रोशनी देने वाले महर्षि दयानंद को तैयार किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में दयानंद वशिष्ठ, रमेश कमरा, रमेश खनेजा, श्यामा जैन, कृष्णा गांधी, राज अरोड़ा और सुदेश वशिष्ठ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर पदम चंद आर्य, जय राज वर्मा, सतीश पुल्यानी, प्रिय दर्शन बग्गा, नरेंद्र आर्य, ज्योत्सना बजाज, सुषमा आर्य, उषा कमरा, वंदना रेलन और विभा आर्य सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।