गुरुग्राम।जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान वरिष्ठ अधिवक्ता संतोख सिंह ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि गुरुग्राम के अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स के निर्माण हेतु तत्काल पर्याप्त भूमि आवंटित की जाए तथा लंबे समय से लंबित टॉवर ऑफ जस्टिस परियोजना का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 16 वर्षों से गुरुग्राम के अधिवक्ता चैंबर्स हेतु भूमि आवंटन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वर्तमान में जिला बार गुरुग्राम के लगभग 11 हजार पंजीकृत अधिवक्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या नए वकीलों की है। अधिकांश अधिवक्ताओं के पास न तो अपना चैंबर है और न ही बैठकर मुकदमों की तैयारी करने, दस्तावेज़ व्यवस्थित करने अथवा मुवक्किलों से चर्चा करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय प्रणाली का अभिन्न एवं महत्वपूर्ण अंग हैं। यदि न्याय व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित बनाना है तो अधिवक्ताओं को भी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। उन्होंने मांग की कि टॉवर ऑफ जस्टिस परिसर के साथ-साथ अधिवक्ताओं के चैंबर्स के निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि आरक्षित एवं आवंटित की जाए। संतोख सिंह ने कहा कि चैंबर्स की अनुपलब्धता केवल अधिवक्ताओं की कार्यक्षमता को प्रभावित नहीं कर रही, बल्कि इसका प्रतिकूल प्रभाव संपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है। यदि अधिवक्ताओं को उचित कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाए तो वे अधिक प्रभावी ढंग से अपने मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे तथा न्यायिक कार्यों का निष्पादन अधिक सुव्यवस्थित और दक्षतापूर्वक हो सकेगा। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम की न्यायिक व्यवस्था आज भी अस्थायी भवनों और पोर्टा केबिनों के सहारे संचालित हो रही है। गुरुग्राम न्यायालय परिसर के रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना के बाद न्यायिक कार्य विभिन्न स्थानों पर बिखर गए हैं। वर्तमान में कुछ न्यायालय पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, कुछ लेबर कोर्ट भवन, कुछ विकास सदन तथा कुछ विकास सदन के निकट स्थापित पोर्टा केबिनों से संचालित किए जा रहे हैं। इस स्थिति के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को अपने मामलों की पैरवी के लिए विभिन्न स्थानों पर बार-बार जाना पड़ता है, जिससे समय, श्रम और संसाधनों की अनावश्यक हानि होती है। उन्होंने कहा कि टॉवर ऑफ जस्टिस का शिलान्यास 22 फरवरी 2014 को किया गया था तथा इसे वर्ष 2020 तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित था। दुर्भाग्यवश वर्ष 2026 तक भी यह महत्वपूर्ण परियोजना अधूरी पड़ी है।
गुरुग्राम में अधिवक्ताओं के चैंबर्स हेतु भूमि आवंटित की जाए तथा टॉवर ऑफ जस्टिस का निर्माण शीघ्र पूर्ण किया जाए : चौधरी संतोख सिंह

