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श्रावण मास की शुरुआत, आस्था, भक्ति और सामाजिक समरसता का महापर्व प्रारंभ

गुरुग्राम।सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र और भक्तों का प्रिय श्रावण मास (सावन) गत दिवस से पूर्ण भक्ति और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हो चुका है। शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंज रहे हैं। संपूर्ण वातावरण शिवमय हो गया है। सैक्टर 4 स्थित श्री कृष्ण मंदिर सहित शहर के विभिन्न मंदिरों सैक्टर 4 के श्रीराम, सैक्टर 9ए स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर, सदर बाजार स्थित हनुमान मंदिर, श्रीकृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर, घंटेश्वर, भूतेश्वर मंदिर, माता चिंतपूर्णी, माता शीतला, हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, गुफावाला मंदिर, सुदर्शन माता मंदिर, श्री गौरीशंकर आदि में श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की जा रही है। भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए यह पूरा महीना सर्वोत्तम माना गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि पौराणिक कथाओं में सावन मास का गहरा उल्लेख है। जब समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर शीतल जल और गंगाजल अर्पित किया था। तभी से सावन में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की परंपरा चली आ रही है। इस माह में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, कुंडली में मौजूद चंद्र दोष या कालसर्प दोष के निवारण के लिए सावन में महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव उपासना अचूक उपाय माना जाता है।
इस बार सावन में होंगे 4 सोमवार  
उनका कहना है कि इस बार सावन माह में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं। सावन सोमवार का व्रत रखने से अविवाहितों को मनोवांछित जीवनसाथी मिलता है और विवाहित जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सावन के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और प्रीति योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों में की गई शिव पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान का फल अक्षय होता है। इसके अलावा, ग्रहों की अनुकूल स्थिति से व्यापार और करियर में उन्नति के विशेष योग बन रहे हैं।
पर्यावरण, स्वास्थ्य और समरसता भी है महत्व
उनका कहना हे कि सावन मास केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू भी है। सावन वर्षा ऋतु का प्रतीक है। वृक्षारोपण और बेलपत्र/पीपल की पूजा के माध्यम से हमारी संस्कृति हमें पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण की सीख देती है। कांवड़ यात्रा सावन का मुख्य आकर्षण है। लाखों श्रद्धालु ऊंच-नीच और जाति-पात का भेद मिटाकर एक साथ गंगाजल लेने निकलते हैं। यह यात्रा भाईचारे और अखंडता का अनुपम उदाहरण है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वर्षा ऋतु में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। सावन के व्रत और सात्विक खान-पान से शरीर शोधित होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पंडित डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि इस पावन मास में सात्विकता और संयम का पालन करें। यदि विस्तृत पूजा संभव न हो, तो केवल एक लोटा शुद्ध जल और एक बेलपत्र श्रद्धापूर्वक ओउम् नम: शिवाय का जाप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। भगवान भोलेनाथ आपके जीवन के सभी कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करेंगे।