गुडग़ांव। गणेश चतुर्थी विघ्रहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान गणेश की जहां विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं उनसे मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना भी करते हैं। पंचाग के अनुसार हर माह 2 चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पडऩे वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है।
आज वीरवार को फाल्गुन विनायक चतुर्थी का पर्व श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा अर्चना करेंगे। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। बताया जाताह ै कि आज विनायक चतुर्थी पर 4 शुभ योग सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग, शुक्ल और शुभ योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पौराणिक मान्यता है कि अनुसार शुभ गणपति के पुत्र माने गए हैं. वहीं ज्योतिष शास्त्र कहता है कि शुभ योग में कोई महान कार्य करने से मनुष्य का व्यक्तिव निखरता है और वह प्रसिद्धि को प्राप्त करता है। ऐसे में गणपति पूजन कर नए काम की शुरुआत करने के लिए यह दिन बहुत शुभ होता है।
मान्यता है कि चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था।


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