गुरुग्राम। सावन शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। श्रद्धालु हरिद्वार व गंगोत्री से गंगाजल लाकर भोले शंकर महादेव का अभिषेक करते हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। हरिद्वार व गंगोत्री से गंगाजल लाकर शिवभक्त कावडिये कल मंगलवार को बड़ी धूमधाम से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों स्थित मंदिरों, शिवालयों व आश्रमों में भोले शंकर महादेव का अभिषेक करेंगे। सभी मंदिरों व शिवालयों में सावन की शिवरात्रि मनाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। अधिकांश श्रद्धालु कावड़ लेकर अपने गंतव्य तक पहुंंच चुके हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर कावडियों की कतारें लगी देखी जा सकती हैं। ये कावडिये मेवात, झज्जर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी व राजस्थान के शहरों में जाने वाले कावडिये गुडगांव होकर ही गुजरते हैं। जिला प्रशासन ने भी कावडियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए हुए हैं। एक लेन कावडियों के लिए बनाई गई है, ताकि कावडिये इस लेन से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। गुडगांव में भी कावडियों की धूम मची है। डाक कावड़ लाने का सिलसिला जारी है।कावडियों के लिए बनाए गए शिविरों में उत्सव जैसा माहौल है। शिविर में कावडियों को सभी सुविधाएं धर्मप्रेमियों ने उपलब्ध कराई हुई हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित राजनाथ शास्त्री का कहना है कि सावन शिवरात्रि पर पूजा-अर्चना करने से इस बार शिवजी के साथ मां पार्वती की भी विशेष कृपा श्रद्धालुओं को प्राप्त होती है। सावन शिवरात्रि का यह पर्व कल मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। अधिकांश श्रद्धालु कावड़ लेकर अपने गंतव्य तक पहुंंच चुके हैं। गुडगांव में भी कावडियों की धूम मची है। कावडिये शिवरात्रि पर्व की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि वे शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
पूजा-अर्चना में इस्तेमाल करें इन सामग्री का
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि दूध, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पंचरस, इत्र, गंध, रौली, मोली, जनेऊ, 5 मिष्ठान, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प, पंचफल, गन्ने का रस, कपूर, धूप आदि सामग्री का भगवान शिव की पूजा-अर्चना इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मां पार्वती के लिए श्रृंगार सामग्री भी पूजा-अर्चना में शामिल की जानी चाहिए।
शिवरात्रि का है विशेष महत्व
ज्योतिषार्यों का कहना है कि सावन शिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है। भगवान शिव और मां पार्वती की व्रत कर पूजा करने से वैवाहिक जीवन की समस्त समस्याएं खत्म हो जाती हैं। महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन शिवरात्रि का व्रत करती हैं। जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने का भी विशेष महत्व है।
पूजा का उत्तम मुहूर्त
पंडित राजनाथ शास्त्री का कहना है कि हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी।
उनका कहना है कि इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त में सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 6 बजे तक का मुहूर्त है। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से लेकर 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त रात 9 बजकर 13 मिनट से लेकर 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। निशिता काल का मुहूर्त रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
सावन शिवरात्रि पर है भद्रा का साया
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि इस वर्ष सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रों में भद्राकाल का शुभ समय नहीं माना जाता है। 11 अगस्त को भद्राकाल सुबह 4 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित होता है। ऐसे में शुभ काम को करने से बचना चाहिए, लेकिन भगवान शिव की भक्ति, पूजा-आराधना और मंत्रों के जाप पर किसी भी तरह की कोई पाबंदी नहीं है।
साईबर सिटी में कावड़ लाने वालों की मची है धूम

