गुरुग्राम। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पिछले कई दशकों से पहली मई को पूरे विश्व में मनाया जाता रहा है। श्रम और पंूजी के आंतरिक द्वंद से पैदा हुए शोषण के विरुद्ध मजदूरों के संघर्ष और उसके परिणाम स्वरूप मजदूरों के कल्याण के लिए किए उपाय भी अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने के प्रमुख कारण हैं। विभिन्न श्रमिक संगठनों ने पहली मई को प्रतिष्ठानों व सार्वजनिक स्थानों पर भी अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस का धूमधाम से आयोजन किया। ट्रेड यूनियन काउंसिल के आह्वान पर कमला नेहरु पार्क में संयुक्त जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों, एटक, इंटक, सीटू, एआईयूटीयूसी, एचएमएस, स्वतंत्र यूनियनें, आशा वर्कर यूनियन, आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन, मिड-डे मील वर्कर, औद्योगिक मजदूर संगठन, रिटायर्ड कर्मचारी संगठन, कर्मचारी संघ, भवन निर्माण कारीगर मजदूर संगठन, युवा संगठन, सफाई कर्मचारी संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा, हरियाणा महिला सभा, जनवादी महिला समिति आदि के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। महिला श्रमिकों की भागीदारी अच्छी खासी रही। जनसभा की अध्यक्षता श्रमिक नेता मनोज कुमार, जसपाल राणा, रानी लांबा, मुकेश शर्मा, श्रवण कुमार गुप्ता, जसबीर प्रधान ने की। संचालन एटक के राज्य महासचिव एडवोकेट अनिल पवार ने किया। श्रमिक नेताओं ने कहा कि मई दिवस केवल एक उत्सव नहीं, अपितु मजदूर वर्ग के संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की महान विरासत का दिन है। 1886 में शिकागो के मजदूरों ने 8 घंटे कार्यदिवस, सम्मानजनक मजदूरी और मानवीय कामकाजी परिस्थितियों के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी। उन्हीं शहीदों की याद में दुनिया भर में 1 मई मजदूर दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज मजदूर वर्ग महंगाई, बेरोजगारी, ठेका प्रथा, निजीकरण, अस्थायी रोजगार, श्रम अधिकारों पर हमलों और दमनकारी नीतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में मई दिवस का संदेश है मजदूर एक हों, संघर्ष तेज करें और अपने अधिकार हासिल करें। देश की मेहनतकश जनता पर महंगाई और बेरोजगारी का दोहरा हमला है, जबकि कॉरपोरेट घरानों को खुली छूट दी जा रही है। श्रम कानूनों को कमजोर कर मजदूरों को असुरक्षित बनाया जा रहा है, जिसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मजदूरों की संगठित शक्ति ही शोषण का जवाब है और मजदूर वर्ग को व्यापक एकता कायम करनी होगी। गुरुग्राम सहित पूरे हरियाणा में मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन मजदूर आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। श्रमिक नेताओं ने सरकार से मांग की है कि ठेका प्रथा बंद की जाए, 8 घंटे कार्यदिवस हो, न्यूनतम वेतन लागू हो, 4 लेबर कोड समाप्त किए जाएं, गिरफ्तार किए गए श्रमिक रिहा किए जाएं और झूठे मुकदमे वापिस लिए जाएं, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दी जाए, महिला श्रमिकों को समान वेतन, सुरक्षा और सम्मान मिले। जनसभा को श्रमिक नेता एसडी त्यागी, जयभगवान, सतपाल नैन, राजेंद्र सिंह, एसएन दहिया, सुरेश नोहरा, जोगेंद्र करोथा, ऊषा सरोहा, श्रवण कुमार, बलवान सिंह दहिया, राजेश शर्मा, सुशील कुमार, बसंत कुमार, परबिंद्र डबास, मीरा, मूर्ति देवी, वजीर सिंह, सरस्वती, नरेश, राजपाल, जय सिंह पुनिया आदि ने संबोधित किया।
मई दिवस पर ट्रेड यूनियन कांउसिल ने किया विशाल जनसभा का आयोजन

