गुरुग्राम। महात्मा बुद्ध जयंती पर समाजसेवियों व धार्मिक संस्थाओं ने कार्यक्रमों का आयोजन भी किया, जिसमें धर्मप्रेमी, शिक्षाविद व समाजसेवी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। देवेंद्र पाल ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध ने साहस, शांति व मानव समाज की सेवा करने का आह्वान देशवासियों से किया था। भगवान बुद्ध के उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने अष्टांगिक मार्ग अपनाने का उपदेश मानव जाति को दिया था। अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है जिसमें दुख का निदान होता है। उन्होंने आत्मसंतुलन की धारणा को अपने उपदेशों में विशेष महत्व दिया था। उनके उपदेशों में इंगित है कि दीन-दुखियों, पशु-पक्षियों के प्रति करुणा का भाव रखें, जरुरतमंदों की सदैव सहायता करें। उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन में भगवान बुद्ध के संदेशों को उतारना होगा और मानव जाति के कल्याण के लिए कार्य करने होंगे। लाचार व जरुरतमंदों की हर प्रकार से सहायता की जानी चाहिए ताकि भगवान बुद्ध के उपदेश साकार हो सकें। 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बिहार के बोधगया में निरंजना नदी के तट पर एक पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। विश्व में गौतम बुद्ध एकमात्र ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिनका संपूर्ण जीवन पर्व एक ही दिवस में प्रकाशित हो गया है। 80 वर्ष की आयु में उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। गौतम बुद्ध का मानना था कि कोई गुरु या कोई शास्त्र अथवा कोई चमत्कार इंसान को मोक्ष या सही मार्ग नहीं दिखा सकता। जब तक इंसान स्वयं को ज्ञान व आचरण से प्रकाशित न करें।
भगवान बुद्ध के उपदेश आज भी हैं प्रासंगिक : देवेंद्र पाल

