गुरुग्राम। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में तीन दिवसीय अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के अंतिम दिन हरिद्वार से वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद जी ने कहा कि भारत एक मात्र देश है, जिसमें गृहस्थ जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक है। जीवन में नित्य नवीनता के लिए तपस्या जरूरी है। विश्व में जहां एक और भोग के लिए युद्ध हो रहे हैं। ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने भोग को छोडक़र तपस्या का जीवन अपनाया।सम्मेलन में जोधपुर से महामंडलेश्वर स्वामी शिव स्वरूपानंद ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे महत्वपूर्ण है। पवित्रता जीवन की नींव है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज पवित्रता के आधार पर श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण कर रही है। नागौर से महंत डॉ. नानक दास जी ने कहा कि सभी धर्मों का सार शांति है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान धर्म, जाति, भाषा, भेद से ऊपर उठकर विश्व एकता के लिए कार्य कर रहा है। आध्यात्मिक शक्ति से ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। कोटा से महामंडलेश्वर जगदीश वेदी जी महाराज ने कहा कि धार्मिक मूल्यों के आधार से ही समाज में सुख-शांति की स्थापना हो सकती है। धर्म सत्ता ही मनुष्य के अंत:करण को शुद्ध करने का कार्य करती है। धर्म सत्ता मानव को कर्तव्य और अधिकार का संतुलन रखना सिखाती है। हरिद्वार से स्वामी निर्मल दास जी ने कहा कि आत्म अवलोकन ही जीवन परिवर्तन का आधार है। जिसका जीवन मूल्यवान है उसे कहने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। कोलकाता से स्वामी प्रफुल्ल चंद्र हलदर ने कहा कि आने वाली परिस्थितियों का सामना अध्यात्मिक शक्तियों से ही कर सकते हैं। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी ने अपने आशीर्वचन प्रदान किए। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व का नव र्निर्माण सिर्फ विज्ञान के बल से नहीं बल्कि योगबल से होगा। उन्होंने कहा कि पवित्रता ही जीवन का मूल मंत्र है। पवित्रता ही सुख-शांति की जननी है। संस्थान के मुख्यालय माउंट आबू से राजयोगिनी उषा दीदी ने कहा कि सुखमय संसार के निर्माण में धर्म सत्ता की प्रमुख भूमिका है। समापन सत्र से पूर्व पवित्र युगल मूर्त जोड़ों का सम्मान किया गया। 10 वर्ष से भी अधिक समय से ब्रह्माकुमारीज से जुड़े ये युगल गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए ईश्वरीय नियम और मर्यादाओं पर पूर्ण रूप से चल रहे हैं।
अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन संपन्न, ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने साधु-संतों को किया सम्मानित

