गुरुग्राम। देश में विश्वस्तरीय सडक़ बुनियादी ढांचे का दावा करने वाले केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के विजन को पलवल में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की घोर लापरवाही पलीता लगा रही है। गत दिवस हुई चंद मिनट की बारिश ने ही पलवल से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और फ्लाईओवर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। सडक़ें तालाब में तब्दील हो गईं और वाहन चालक पानी के बीच रास्ता तलाशने को मजबूर नजर आए। जलभराव ने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कुछ मिनट की सामान्य वर्षा भी राजमार्ग के ड्रेनेज सिस्टम को ठप कर सकती है, तो करोड़ों रुपये की लागत से बने इन प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और निगरानी का स्तर आखिर क्या है? फ्लाईओवर के नीचे, सर्विस रोड और राजमार्ग के कई हिस्सों में घुटनों तक पानी भरने से यातायात घंटों बाधित रहा। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी रही, क्योंकि पानी के नीचे सडक़ के गड्ढे छिप जाने से लगातार दुर्घटनाओं की आशंका बनी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर वर्ष मानसून से पहले जल निकासी तंत्र को दुरुस्त करने और नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। एनएचएआई के अधिकारी केवल कागजी तैयारियों तक सीमित हैं। उनका कहना है कि उक्त क्षेत्र की तस्वीरें केवल जलभराव नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाती हैं, जो मंत्री नितिन गडकरी के विकास मॉडल को भी कठघरे में खड़ा कर रही है। चंद मिनट की बारिश में राजमार्ग का तालाब बनना, सीधे तौर पर व्यवस्था की विफलता का प्रतिबिंब है।
जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही नितिन गडकरी के विकास मॉडल को लगा रही है पलीता

