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कावड़ यात्रा चली आ रही है प्राचीन काल से ही

गुरुग्राम।देवों के देव महादेव को समर्पित कावड़ यात्रा शुरु हो चुकी है, जिसमें असंख्य लोग कावड़ लेने के लिए हरिद्वार भी रवाना हो चुके हैं। गंगा का शुद्ध गंगाजल लाकर भगवान शिव का महाशिवरात्रि पर अभिषेक भी किया जाएगा। धार्मिक शास्त्रोंं के अनुसार पवित्र नदी से पैदल नियमपूर्वक जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाने को कावड़ यात्रा कहा जाता है, यह कठिन यात्रा होती है। इस यात्रा में पुरुष ही नहीं, अपितु महिलाएं भी शामिल होती हैं। अधिकांश लोग गंगाजल को गोमुख, गंगोत्री, ऋषिकेश व हरिद्वार से लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि सावन में शिवभक्त सच्ची श्रद्धा के साथ कंधे पर कावड़ रखकर बोल बम का जयघोष करते हुए पैदल यात्रा करते हैं।
अश्वमेघ यज्ञ का मिलता है फल
कावड लाने वालों को हर कदम के साथ एक अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। कावड का प्रारंभ वेदों के अनुसार भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को पिया तो उनकी जलन को शांत करने के लिए शिव के परमभक्त रावण ने गंगाजल लाकर शिवजी को अर्पण कर उत्पन्न हुई नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर दिया था। शास्त्रों में उल्लेख है कि शिव भक्त परशुराम ने कावड़ यात्रा को सावन माह में ही उत्तरप्रदेश के मेरठ जिले स्थित कुरा महादेव स्थापित कर जलाभिषेक किया था। इसी प्रकार श्रवण कुमार द्वारा अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बिठाकर गंगा स्नान कराकर शिवजी को जल भी अर्पण किया था। तभी से यह कावड़ यात्रा निरंतर चली आ रही हैं।
देश में कावड़ यात्राएं
वेदों के अनुसार नर्मदा नदी से महाकाल तक, गंगाजी से नीलकंठ महादेव तक, गंगाजी से वैजनाथ धाम (बिहार) तक, गोदावरी से त्रयम्बकेश्वर तक, गंगाजी से केदारेश्वर तक, गंगाजी से शिवालय तक। इन स्थानों के अलावा असंख्य यात्राएं स्थानीय स्तर पर प्राचीन काल से की जाती रही हैं।
विभिन्न रुपों में निकाली जाती रही हैं कावड़ यात्राएं
श्रद्धालु जहां सामान्य कावड़ लाते हैं, वहीं डाक कावड़, दांडी कावड़, श्रृंगार कावड व खड़ी कावड़ भी लेकर आते हैं।
नशा आदि का न करें सेवन
कावड यात्रा शिव जी की भक्ति करने का एक मार्ग है। कावड़ यात्रा करते सभ्य किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन की भी मनाही है। कहा जाता है कि कावड़ में बहती हुई पवित्र नदी का जल ही भरा जाता है। कुए या तालाब का नहीं।
प्रशासन के दिशा-निर्देशों का करें पालन
धार्मिक संस्थाओं के लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कावडियों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों का कावडियों को पालन करना चाहिए, ताकि वे सुरक्षित कावड़ यात्रा पर जा सकें और सुरक्षित ही गंगाजल लेकर महादेव का जलाभिषेक कर सकें। अपने स्वास्थ्य का भी उन्हें ध्यान रखना चाहिए। संस्थाओं द्वारा शिविरों की व्यवस्थाएं की गई हैं, जिनका लाभ इन कावडियों को उठाना चाहिए।