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स्वतंत्रता सेनानी किशोरीलाल ने श्रमिक व कमेरे वर्ग के लिए किया था बड़ा संघर्ष

गुडग़ांवI देशवासी आजादी का 75वां अमृत महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों व क्रांतिकारियों को राष्ट्र याद कर रहा है। देश की आजादी के लिए असंख्य लोगों ने अपना सर्वोच्च योगदान दिया था। स्वतंत्रता
सेनानी किशोरीलाल की जयंती व पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि उन्होंने शहीद ए आजम भगत सिंह व उनकी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ भी काम किया था। उनका जन्म पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव धरमपुर में 11 जुलाई 1912 को हुआ था। डीएवी कॉलेज लाहौर से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी। किशोरीलाल क्रांतिकारियों से बड़े प्रभावित थे। वह नौजवान भारत सभा में शामिल हो गए थे।

अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण अन्य युवाओं का भी उन्हें पूरा साथ मिला और देश की आजादी के लिए उन्होंने उन्हें तैयार भी किया। लाहौर षडय़ंत्र मामले में जहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजों ने फाँसी की सजा सुनाई थी, वहीं किशोरी लाल को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। अपने जेल प्रवास के दौरान वह कई कम्युनिस्ट कैदियों के संपर्क में आए और कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य भी बन गए थे। उन्हें 1948 में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की पंजाब इकाई के अध्यक्ष के रुप में चुना गया था। बाद में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी हिंद संघ की स्थापना भी की थी। उन्होंने गोवा की मुक्ति के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में भी सक्रिय भाग लिया था। श्रमिक नेताओं का कहना है कि 11 जुलाई 1990 को एक सडक़ दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। उन्होंने श्रमिकों से आग्रह किया कि किशोरीलाल के आदर्शों पर चलकर ही श्रमिक व कमेरे वर्ग का भला संभव है।

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