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3 मार्च को एक दिव्य भव्य महानरसिंह यज्ञ का होगा आयोजन

गुरुग्राम।योग मठ गुरूग्राम हरियाणा के पूज्य पीठाधीश्वर बाल योगी डॉ अलखनाथ अवधूत को स्वप्न में हुई दिव्य प्रेरणा को शिरोधार्य करते हुए यह संकल्प लिया है कि दिनांक 3 मार्च पूर्णिमा की रात्रि को पौराणिक कथाओं के अनुसार भक्त प्रहलाद को हालिका द्वारा जलाने का प्रयास मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी के पास एरच नामक स्थान पर किया गया था जो राजा हिरण्यकश्यप की राजधानी थी। एक अन्य मान्यता के अनुसार यह स्थान हरदोई, उत्तर प्रदेश भी माना जाता है, जहां आज भी होलिका दहन के अवशेष और नरसिंह मंदिर प्रसिद्ध हैं जो गुरुग्राम से लगभग 400 किमी की दूरी पर है। 3 मार्च को एक दिव्य भव्य महा नरसिंह यज्ञ किया जा रहा है जिसका उद्देश्य भारत की मूल सनातन संस्कृति के रक्षण सुरक्षण के साथ साथ सनातन धर्म की पुष्टि ओर सनातन के सच्चे प्रहरियों और यौद्धाओं की दशों दिशाओं में विजय ओर कल्याण के हेतु यज्ञ कुण्ड में दिव्य औषधियों और घृत आदि की आहुतियां दी जाएंगी। देश के उज्ज्वल भविष्य की भगवान नरसिंह और मां प्रत्यंगिरा के लिए हविष्य प्रदान किया जाएगा।