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जीवन में विनम्रता और शांति का संचार करती है आद्यात्मिकता : बीके आशा

गुरुग्राम। धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज द्वारा जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) परिसर में साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स एवं आर्किटेक्ट्स के लिए डिस्कवर, डिजाइन एंड ट्रांसफॉर्म विषय पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और वास्तुकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों के मेल से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। प्रथम दिन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा ने कहा कि आध्यात्मिकता जीवन में विनम्रता और शांति का संचार करती है। विज्ञान के बड़े से बड़े आविष्कार भी मौन यानी साइलेंस की गहराइयों से जन्म लेते हैं। साइंस और साइलेंस एक-दूसरे के पूरक हैं। जब हमारे विचार श्रेष्ठ और सकारात्मक होंगे, तभी एक सुंदर और नई दुनिया का निर्माण संभव हो सकेगा। राजयोग का निरंतर अभ्यास मन और बुद्धि पर नियंत्रण सिखाता है। जब मन शुद्ध होता है, तो उससे जनहितकारी और नए आविष्कार जन्म लेते हैं। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के निदेशक प्रो. वीके पॉल ने कहा कि अकादमिक या वैचारिक चर्चाओं का वास्तविक महत्व तभी है जब वे धरातल पर कर्म के रूप में दिखाई दें। उन्होंने जोर दिया कि जिम्मेदारियों को ठोस परिणाम में बदलना ही आध्यात्मिकता का असली मकसद है। डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक हरि बाबू श्रीवास्तव ने अहंकार को प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि सही दिशा में कर्म करने की प्रेरणा केवल सच्चे ज्ञान से मिलती है। आयोजन को बीके मोहन सिंघल, बीके भारत भूषण, बीके पीयूष, बीके गिरिजा, वैज्ञानिक अनुपम प्रकाश, प्रो. प्रियंका जैन,  प्रो. भोलाराम गुर्जर, अंजली भावे, कमल कुमार, सर्वेश कुमार आदि ने भी संबोधित किया। आयोजन को सफल बनाने में बीके अंजलि, बीके विधात्री, आदि का सहयोग रहा।