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5 दिवसीय मशरूम उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ संपन्न

गुरुग्राम। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के तहत जिले के गांव शिकोहपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 5 दिवसीय मशरूम उत्पादन तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें गुरुग्राम, झज्जर और नूंह जिलों के 25 युवाओं और महिला संभागियों ने हिस्सा लिया, ताकि वे कृषि के साथ-साथ मशरूम की खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. भरत सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों के अवशेषों जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का और मूंज के सूखे पूलों व बांस का उपयोग कर झोपड़ीनुमा कम लागत वाला मशरूम गृह तैयार किया जा सकता है। इसमें प्राकृतिक रूप से वर्ष में 3-4 बार मशरूम की फसल ली जा सकती है। वहीं, उच्च तकनीक युक्त आधुनिक मशरूम गृह का निर्माण कर वर्ष में 6-8 बार श्वेत बटन, ढिंगरी और दूधिया मशरूम की फसलें उगाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में वर्षभर ताजा मशरूम की मांग बनी रहती है और मौसम के अनुसार इसके दाम 100 से लेकर 400 प्रति किलोग्राम या उससे भी अधिक मिलते हैं। श्वेत बटन मशरूम के लिए सितंबर से फरवरी का समय सबसे अनुकूल होता है। प्रशिक्षण के दौरान संभागियों को मशरूम गृह निर्माण, कंपोस्ट व केसिंग मिट्टी तैयार करना, नमी व तापमान प्रबंधन, स्पॉनिंग (बीज मिलाना), कटाई, पैकिंग और मार्केटिंग की विस्तार से जानकारी दी गई। बागवानी विभाग के ओमकार राणे ने सरकार द्वारा मशरूम यूनिट की स्थापना पर दी जाने वाली सब्सिडी और विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. बी.के. नंदा ने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के बाद अपने फार्म पर मशरूम यूनिट स्थापित कर इसे व्यावसायिक स्तर पर अपनाने के लिए प्रेरित किया। आयोजन को सफल बनाने में डा. गौरव पपनै, अभय यादव आदि का सहयोग रहा।