गुरुग्राम। भिवाड़ी के टपूकड़ा क्षेत्र स्थित होण्डा मोटर्स में 10 वर्ष हुए श्रमिक आंदोलन के मामले की सुनवाई करते हुए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रश्मित कौर की अदालत ने पुख्ता सबूतों व गवाहों के अभाव में सभी 8 श्रमिक नेताओं को बरी कर दिया है। श्रमिकों ने इसे सच्चाई की जीत बताया है। श्रमिक संगठन एटक के राज्य महासचिव अनिल पंवार का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व टपूकड़ा के होण्डा मोटर्स प्लांट में श्रमिक आंदोलन चल रहा था। जिसके चलते पुलिस ने 8 श्रमिक नेताओं अनिल पंवार, सतपाल गिल, रमेश प्रधान, सोनू, कृष्ण, सुशील, दीपक, सोनू व श्रमिक नेता स्व. कुलदीप जांघू के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया था, जिसकी सुनवाई उक्त अदालत में चल रही थी। अनिल पंवार का कहना है कि श्रमिक आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। अदालत में अभियोजन पक्ष श्रमिकों पर लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं कर पाया था। उनका कहना है कि श्रमिकों की न्यायालय के प्रति सदैव आस्था रही है और न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा रहा है। सच्चाई की जीत हुई है। उनका कहना है कि कुलदीप जांघू का कुछ माह पूर्व स्वर्गवास हो गया था। उनके निधन के बाद यह फैसला आया है। श्रमिक नेता कुलदीप जांघू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
होण्डा मोटर्स में 10 वर्ष पूर्व हुए श्रमिक आंदोलन के सभी श्रमिक नेता बरी

