गुरुग्राम। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को साइबर सिटी में वट पूर्णिमा का पर्व पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर, हाथों में पूजा की थाली लिए नजदीकी वट वृक्ष के पास पहुंची और अपने पति की लंबी आयु व सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धर्माचार्य हरीश उपाध्याय का कहना है कि शास्त्रों में वट वृक्ष को पूजनीय माना गया है क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इस वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सभी दोष दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उनका कहना है कि सुहागिन महिलाओं ने बरगद के पेड़ को जल अर्पित किया और अक्षत, कुमकुम, भीगे चने व फल चढ़ाए। इसके बाद महिलाओं ने वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत (कलावा) को 7 या 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा की और अपने अखंड सुहाग की कामना की। इस अवसर पर वट वृक्ष के नीचे सामूहिक रूप से माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा सुनी गई। बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि जिस तरह सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत धर्म के बल पर यमराज से भी अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे, ठीक उसी तरह सुहागिनें इस परंपरा को निभाते हुए अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। पूजा संपन्न करने के बाद महिलाओं ने अपने घर के बुजुर्गों और सास के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
वट वृक्ष की पूजा कर मांगी पति की दीर्घायु

