गुरुग्राम। सावन शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। श्रद्धालु हरिद्वार व गंगोत्री से गंगाजल लाकर आज मंगलवार को बड़ी धूमधाम से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों स्थित मंदिरों, शिवालयों व आश्रमों में भोले शंकर महादेव का अभिषेक करेंगे। सभी मंदिरों व शिवालयों में सावन की शिवरात्रि मनाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सावन शिवरात्रि पर पूजा-अर्चना करने से शिवजी के साथ मां पार्वती की भी विशेष कृपा श्रद्धालुओं को मिलेगी। सावन शिवरात्रि का पर्व आज धूमधाम से मनाया जाएगा। अधिकांश श्रद्धालु कावड़ लेकर अपने गंतव्य तक पहुंंच चुके हैं। गुडगांव में भी कावडियों की धूम मची है। डाक कावड़ लाने का सिलसिला जारी है।कावड शिविरों में उत्सह जैसा माहौल
गुडग़ांव में भी कावडियों की धूम मची हुई है। कावडियों के लिए बनाए गए शिविरों में उत्सव जैसा माहौल है। शिविर में कावडियों को सभी सुविधाएं धर्मप्रेमियों ने उपलब्ध कराई हुई हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि हिंदू पंचांग के अनुसार सावन शिवरात्रि सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पूजा-अर्चना में इस्तेमाल करें इन सामग्री काज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दूध, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पंचरस, इत्र, गंध, रौली, मोली, जनेऊ, 5 मिष्ठान, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प, पंचफल, गन्ने का रस, कपूर, धूप आदि सामग्री का भगवान शिव की पूजा-अर्चना इस्तेमाल किया जाना चाहिए।शिवरात्रि का है विशेष महत्वज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सावन शिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है। भगवान शिव और मां पार्वती का व्रत कर पूजा करने से वैवाहिक जीवन की समस्त समस्याएं खत्म हो जाती हैं। जहां महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन शिवरात्रि का व्रत करती हैं। जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने का भी विशेष महत्व है।
आज कावडिये देवों के देव महादेव का जलाभिषेक कर मनाएंगे सावन की शिवरात्रि धूमधाम से

