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मौंत का ईलाज नहीं है चिकित्सकों के पास भी : स्वामी ज्ञानानंद महाराज

गुरुग्राम शास्त्रों में उल्लेख है कि मानव जीवन कमल के
पत्तों पर पड़ी ओस की बूंद की भांति है, जिसके ठहरने का एक पल का भी पता
नहीं होता। ऐसा ही हाल जीवन का है। न जाने कौनसी सांस अंतिम सांस बन जाए।
उक्त उद्गार गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने वीरवार को आरएसएस
प्रांत संघचालक पवन जिंदल की माता, भाई व पुत्र की श्रद्धांजलि सभा में
व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में एक ही परिवार से 3-3 परिजनों
का चले जाना वास्तव में जीवन में बहुत बड़ी घटना है। यह ऐसा समय है, जब
शब्द भी मौन हो जाते हैं, लेकिन परमात्मा की मर्जी के सामने किसी का जोर
नहीं चलता। महाराज जी ने कहा कि वैज्ञानिक युग चल रहा है, लेकिन ऐसी
घटनाओं पर आकर विज्ञान भी मौन हो जाता है। मौंत का ईलाज चिकित्सकों के
पास भी नहीं हैं। उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि ऐसे समय
में धैर्य के साथ जीवन को आगे बढ़ाएं। श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी, आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत, प्रदेश के मुख्यमंत्री
मनोहरलाल की ओर से भी संदेश प्राप्त हुए। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों
में आरएसएस के प्रांत प्रचारक विजय कुमार, डा. सुरेंद्र, सुभाष आहूजा,
केंद्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया, विधायक प्रमोद विज, सुधीर सिंगला, भाजपा
की जिलाध्यक्ष गार्गी कक्कड़, सुभाष सिंगला, हरीश कुमार, प्रतिमा मनचंदा
आदि भी शामिल रही। गौरतलब है कि एक सप्ताह के भीतर ही पवन जिंदल की माता,
भाई व पुत्र का देहांत हो गया था। यह परिवार के ऊपर बहुत बड़ी विपत्ति
है।

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