गुड़गांव। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के प्रकाट्य दिवस के उपलक्ष मे सामाजिक समरसता मंच एवं अशोक सिंघल वेद विज्ञान रिसर्च एवं
प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में वर्ण व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप एवं इसकी समसामयिक प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें प्रसिद्ध शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता व प्रबुद्ध नागरिकों ने भी बढ़-चढक़र भाग लिया।
प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक एवं सलाहकार डा. कुन्दन लाल पटेल ने विषय की महत्ता बताते हुए कहा कि महर्षि के समय मौजूद सामाजिक समरसता को याद करते हुए भारतीय जनमानस के सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक जागरण में तथा सामाजिक समरसता तथा सर्व कल्याण के उद्देश्य के लिए शसामाजिक क्रान्ति के प्रति जागरूक करने और योगदान देने की आवश्यकता है। साहित्यकार श्याम स्नेही शास्त्री ने कहा कि जन्मजाति आधारित व्यवस्था अनुपयोगी है।
व्यक्ति के स्वेच्छा से व्यवसाय अपनाना चाहिए। प्रो. सुरेंद्र कुमार, शिक्षाविद् डा. अशोक दिवाकर, जगदीश ग्रोवर आदि ने भी चर्चा में भाग लिया। समरसता मंच के संयोजक नरेश कुमार व सलिल कुमार मिश्रा ने बताया कि इस आयोजन में शिक्षाविद्, लेखक व अन्य गणमान्य व्यक्ति मदन साहनी, डा. एसपी सिंह, डा. प्रेम पोपली, सीएस भारद्वाज, विमल शर्मा, अनिल कशयप, राजू शर्मा, मोहनीश लारोईया, संजीव तायल आदि भी मौजूद रहे।


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