गुरुग्राम। मुसलमान समुदाय का माह-ए-रमजान चल रहा है। सोमवार को रोजेदारों ने 19वें रोजे पर नमाज अता कर अल्लाह से अमन-चैन की दुआ की। सोहना चौक स्थित जामा मस्जिद में भी रोजेदार नमाज करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मस्जिदों की प्रबंधन कमेटियों ने भी रोजेदारों के लिए समुचित व्यवस्था की हुई है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। मस्जिद के आस-पास लगी खाद्य सामग्री की रेहडिय़ों व दुकानों से रोजेदार जमकर खाद्य सामग्री की खरीददारी कर रहे हैं। जामा मस्जिद के इमाम जान मोहम्मद का कहना है कि अल्लाह के दिखाए रास्ते पर चलना एक रोजेदार के लिए केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, अपितु यह रूहानी और अखलाकी (नैतिक) सुधार का एक मुकम्मल तरीका है। रमज़ान के पाक माह में रोजा रखने वाला व्यक्ति सब्र और अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता के जरिए उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करता है। उनका कहना है कि रोजा एक ऐसी इबादत है जो सीधे अल्लाह की प्रसन्नता पाने के लिए की जाती है। यह इबादत इंसान को अपनी इच्छाओं और अहंकार पर काबू पाना सिखाती है। भूख और प्यास का एहसास इंसान को उन लोगों की तकलीफों से जोड़ता है जो अभाव में जीते हैं, जिससे इंसान में दयाभाव पैदा होता है। अल्लाह के रास्ते पर चलने वाला रोजेदार अपने शरीर, मन और आत्मा तीनों को पाक (पवित्र) करता है, ताकि वह नेक इंसान बन सके। जामा मस्जिद के इमाम जान मोहम्मद का कहना है कि आज मंगलवार को 20वां रोजा है। खत्म सहरी का समय प्रात: 5 बजकर 17 मिनट व रोजा इफ्तार का समय सायं 6 बजकर 28 मिनट पर होगा।
इच्छाओं और अहंकार पर काबू पाना सिखाती है अल्लाह की इबादत : जान मोहम्मद

