उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई साढ़े 5 लाख रुपए की जुर्माना राशि को 24 प्रतिशत ब्याज दर से किया जाए वापिस
गुडग़ांव। बिजली चोरी के मामले की सुनवाई करते हुए सिविल जज हिमानी गिल की अदालत ने बिजली निगम द्वारा उपभोक्ता पर लगाए गए बिजली चोरी के आरोपों को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिए हैं कि उपभोक्ता द्वारा जुर्माने के रुप में जमा कराई गई 5 लाख 51 हजार 620 रुपए की धनराशि को 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से वापिस की जाए।
ओल्ड दिल्ली रोड गुडग़ांव के निवासी धर्मेंद्र यादव के अधिवक्ता क्षितिज मेहता से प्राप्त जानकारी के अनुसार उपभोक्ता को बिजली निगम द्वारा 2 नोटिस 4 लाख 96 हजार 620 रुपए व 55 हजार रुपए के नोटिस दिए गए थे। उपभोक्ता पर आरोप लगाया गया था कि उसके बिजली के मीटर की वर्ष 2017 की 31 मार्च को जांच कराई गई है, जिसमें पाया गया कि मीटर के साथ उपभोक्ता ने छेड़छाड़ करते हुए बिजली की चोरी की है। उसने बिजली निगम के अधिकारियों से भी आग्रह किया है कि उसने कोई चोरी नहीं की। लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक नहीं सुनी। कहीं बिजली निगम उसका बिजली का कनेक्शन न काट दे, इस भय से उसने दोनों नोटिसों की जुर्माना राशि 5 लाख 51 हजार 620 रुपए बिजली निगम में जमा कर दिए थे। बिजली निगम में धनराशि जमा कर वर्ष 2017 की 4 जुलाई को बिजली निगम के खिलाफ अदालत में मामला दायर कर दिया।
उक्त अदालत में मामले की सुनवाई हुई। बिजली निगम द्वारा अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों व गवाहों से यह साबित नहीं हो सका कि उपभोक्ता ने बिजली चोरी की है। जिस पर अदालत ने बिजली चोरी के मामले को गलत करार देते हुए बिजली निगम को आदेश दिया कि जमा कराई गई 5 लाख 51 हजार 620 रुपए की धनराशि को 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से उपभोक्ता को वापिस किया जाए। अधिवक्ता का कहना है कि उपभोक्ता बिजली निगम के खिलाफ प्रताडि़त करने का मामला अदालत में दायर करने की तैयारी में जुट गया है।


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