गुडग़ांव। नाबालिका के वीडियो को तोड़-मरोडक़र प्रसारित करने के मामले में आरोपी दीपक चौरसिया ने निचली अदालत द्वारा जारी गैर जमानती वारंट को पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी कि उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन बंसल ने याचिका का निपटारा करते हुए चौरसिया को आगामी 3 मार्च को जिला अदालत में पेश होने का आदेश दिया है और साथ ही 2 लाख रुपए की कॉस्ट भी लगाई है ताकि इसका इस्तेमाल पीजीआई के जरुरतमंद मरीजों के उपचार के लिए खर्च किया जा सके। 2 लाख रुपए जरुरतमंद मरीज राहत कोष में जमा कराने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है। दीपक चौरसिया ने याचिका दाखिल करते हुए गुडग़ांव जिला अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की, जिसके तहत उनके बेल बॉण्ड रद्द कर दिए गए हैं। दीपक चौरसिया के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री का इंटरव्यू होने के चलते वह जिला अदालत में पेश नहीं हो सके थे, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया गया।
इस मामले की पैरवी कर रहे सामाजिक संस्था जन जागरण मंच के अध्यक्ष हरीशंकर कुमार का कहना है कि इस मामले के आरोपी दीपक चौरसिया ने अदालती कार्यवाही में उपस्थित होने की छूट से संबंधित याचिका भी दायर की हुई है। जिस पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब उच्च न्यायालय आगामी 10 मार्च को सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2013 की 2 जुलाई को पालम विहार क्षेत्र के सतीश कुमार (काल्पनिक नाम) के घर संत आसाराम बापू आए थे। बापू ने परिवार के सदस्यों सहित उनकी 10 वर्षीय भतीजी को भी आशीर्वाद दिया था। उस समय सतीश के घर के कार्यक्रम की वीडियो आदि भी बनाई गई थी। बापू आसाराम प्रकरण के बाद टीवी चैनलों ने बनाई गई वीडियो को प्रसारित किया था। परिजनों ने आरोप लगाए थे कि उनकी व आसाराम बापू की छवि धूमिल करने के लिए वीडियो को तोड़-मरोडकऱ अश£ील व अभद्र तरीके से प्रसारित किया गया था। जिससे परिवार व मासूम बालिका को मानसिक व सामाजिक रुप से कष्ट झेलना पड़ा था। आहत होकर परिजनों ने पालम विहार पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की पैरवी सामाजिक संस्था जन जागरण मंच के अध्यक्ष हरी शंकर कुमार व उनकी टीम करती आ रही है।


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