गुरुग्राम। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानि कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसके लिए शहर के शीतला माता मंदिर, सुदर्शन मंदिर, गुफा वाला मन्दिर, सिद्वेश्वर मन्दिर, धन्टेश्वर मन्दिर, गीता भवन, चिंतपूर्णी मंदिर, राम मन्दिर सेक्टर -4 स्थित श्रीकृष्ण मंदिर, सैक्टर 9ए स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर, श्रीराम मंदिर, सूर्य विहार के माता वैष्णो देवी मंदिर, प्रकाशपुरी आश्रम, सदर बाजार स्थित हनुमान मंदिर आदि में न केवल तैयारियां चल रही हैं, अपितु उन्हें रोशनियों से जगमग कर दिया गया है। जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर व्रत रखकर मनाया जाता है। इस पर्व का बड़ा ही महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है।
मिट जाते हैं 7 जन्मों के पाप-तप
ज्योतिषाचार्य डा. मनोज शर्मा का कहना है कि जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए, इससे बड़ा लाभ होता है। इससे 7 जन्मों के पाप-ताप मिटते हैं। जन्माष्टमी एक तो उत्सव है, दूसरा महान पर्व है, तीसरा महान व्रत और पावन दिन भी है। उनका कहना है कि वायु पुराण और कई ग्रंथों में जन्माष्टमी के दिन की महिमा का उल्लेख भी है। कहा जाता है कि जो जन्माष्टमी की रात्रि को उत्सव के पहले अन्न खाता है, भोजन कर लेता है वह नराधम है। यह भी उल्लेख है कि जो उपवासकरता है, जप ध्यान करके उत्सव मना के फिर खाता है, वह अपने कुल की 21 पीढियों का उद्धार कर लेता है और वह मनुष्य परमात्मा को साकार रूप में अथवा निराकार तत्त्व में पाने में सक्षमता की तरफ बहुत आगे बढ़ जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि व्रत की महिमा सुनकर शारीरिक रुप से कमजोर लोग भी जन्माष्टमी का व्रत रखें।
जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप देता है अनंत गुणा फल
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि बच्चा, अति कमजोर अनुकूलता के अनुसार फल आदि खाएं। जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप अनंत गुणा फल देता है। उसमें भी जन्माष्टमी की पूरी रात जागरण करके जप ध्यानका विशेष महत्त्व है। भविष्य पुराण के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत संसार में सुख-शांति और प्राणीवर्ग को रोगरहित जीवन देने वाला, अकाल मृत्यु को टालने वाला, गर्भपात के कष्टों से बचाने वाला तथा दुर्भाग्य और कलह को दूर भगाने वाला होता है। उनका यह भी कहना है कि आज और कल दोनों दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसके लिए शहर के सभी मंदिरों मेंव्यवस्था भी की गई है।
मोहरात्रि में जागरण और जप का महात्म्य
उनका कहना है कि शिवपुराण के अनुसार जन्माष्टमी की रात्रि में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मन्त्र का जप करते हुए जागरण करने से जीव को संसार की मोह-माया से मुक्ति मिलती है। इस दिन किया गया जप अनंत गुना फल प्रदान करता है। विशेषकर गुरु मन्त्र अथवा क्लीं कृष्णाय नम: मन्त्र का जप करने से जीवन के तीनों ताप शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं।
व्रतों का राजा है जन्माष्टमी का व्रत
जन्माष्टमी के व्रत को व्रतराज की संज्ञा दी गई है। वायु पुराण एवं अन्य शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन व्रत-उपवास रखकर जप-ध्यान करने और उत्सव मनाने के बाद पारण करने वाला साधक अपने कुल की 21 पीढय़िों का उद्धार कर देता है। साथ ही, इससे सात जन्मों के पाप-ताप नष्ट होते हैं और साधक परमात्मा के साकार व निराकार तत्त्व को पाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ता है। शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि नियम और श्रद्धा के साथ-साथ शरीर की स्थिति का ध्यान रखना भी आवश्यक है। मधुमेह के रोगी, छोटे बालक, अति वृद्ध एवं शारीरिक रूप से कमजोर लोग अपनी अनुकूलता के अनुसार फलाहार ग्रहण करके भी इस पावन व्रत का पालन कर सकते हैं।
आज धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

