गुरुग्राम।भगवान शिव का प्रिय सावन माह चल रहा है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक सावन माह में नियमित रुप से कर रहे हैं। शिवपुराण के अनुसार सावन माह में भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर निवास करते हैं। शिवलिंग की पूजा, जलाभिषेक के साथ वेलपत्र भी अर्पित किए जाते हैं। वेलपत्र का शिवपुराण में भी बड़ा महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डा. मनोज शर्मा का कहना है कि शिवपुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव को वेलपत्र अर्पित करने से एक करोड़ कन्यादान के बराबर श्रद्धालुओं को फल मिलता है। वेलपत्र से शिवशंकर का मस्तिष्क भी शीतल रहता है। डा. मनोज का कहना है कि वेदों और पुराणों में भी वेेलपत्र का धार्मिक, औषधीय और सांस्कृतिक महत्व बताया गया है। उनका कहना है कि वेलपत्र से पूरे ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ है। समुद्र मंथन में हलाहल नाम का विष निकला था। इस विष का प्रभाव विश्व पर न पड़े, इसलिए भगवान शिव ने उसका पान किया था। विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव को देवी-देवताओं ने वेलपत्र और जल का सेवन कराया था, जिससे भगवान शिव को काफी राहत मिली थी। डा. मनोज का कहना है कि वेलपत्र के वृक्ष की छाल, जड़, फल और पत्तों का विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेदिक पद्धति में इन वेलपत्रों से मसूड़ों से खून आना, अस्थमा, पेचिस, पीलिया, एनीमिया और कई अन्य बीमारियों का उपचार भी होता है। इतना ही नहीं वेलपत्रों में विटामिन ए, सी, बी1, बी6, बी12, केल्सियम, पोटेसियम और फाइबर भरपूर मात्रा मे पाए जाते हैं। इसमें एंटी फंगल और एंटी वायरल गुण भी होते हैं, जो शरीर को कई संक्रमणों से लडऩे में मदद भी करते हैं। उनका यह भी कहना है कि माता पार्वती का वेलपत्र में प्रतिबिम्ब होने के कारण इसे भगवान शिव को अर्पण किया जाता है।
सावन में वेलपत्र का है बड़ा महत्व

