गुरुग्राम। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संघर्ष मंच के बैनर तले सुखराली सामुदायिक केंद्र में इंजीनियरों, कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा और बिजली उपभोक्ताओं की संयुक्त रैली आयोजित की गई। रैली में गुरुग्राम और नूंह में प्रस्तावित समानांतर वितरण (पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन) लाइसेंस का पुरजोर विरोध किया गया। रैली के बाद हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) को संबोधित ज्ञापन सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (ऑपरेशन सर्कल 1 व 2) को सौंपा गया। इसमें लाइसेंस आवेदन को तुरंत निरस्त करने और विशेषज्ञ समिति को भंग करने की मांग की गई। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन इंजी. शैलेंद्र दुबे और ईईएफआई के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि बिजली का निजीकरण किसान, गरीब और आम जनता के खिलाफ है। सरकारी वितरण निगम गुरुग्राम में 4,700 करोड़ का निवेश कर चुका है। निजी कंपनी द्वारा इतने कम निवेश में नया नेटवर्क बनाना असंभव है, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होगा। उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों को निजी कंपनी को सौंपने से सरकारी निगम आर्थिक रूप से कमजोर होंगे और आम जनता पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुरेश कौथ और धर्मपाल बढाला ने स्पष्ट किया कि किसान किसी भी कीमत पर पैरेलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग के फैसलों को लागू नहीं होने देंगे। रैली में सुरेश राठी, मनोज सैनी, राजेश सिरोही, उषा सरोहा सहित अनेक कर्मचारी व सामाजिक नेता उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चेतावनी दी गई कि यदि लाइसेंस निरस्त नहीं हुआ तो पूरे हरियाणा में व्यापक जन आंदोलन चलाया जाएगा।
समानांतर बिजली लाइसेंस के खिलाफ कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी

