गुरुग्राम। प्रदेश की भाजपा सरकार भले ही गुरुग्राम को वल्र्ड क्लास और बेहतर शहर बनाने का दावा करते रहें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। महज आधे घंटे की बारिश ने एक बार फिर सरकार व प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी। शहर के प्रमुख रास्तों से लेकर गलियों तक पानी भर गया, सीवर ओवरफ्लो हो गए और लोगों के घरों में गंदा पानी सप्लाई होने लगा। समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के प्रदेशाध्यक्ष मनीष यादव का कहना है कि शहर की इस बदहाली को देखकर अब स्थानीय नागरिकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जनता का सीधा सवाल है अगर भाजपा सरकार का बेहतर गुरुग्राम यही है, तो हमें ऐसा बदहाल और नारकीय गुरुग्राम नहीं चाहिए। जलभराव से निपटने के लिए अधिकारियों ने शहर में करीब 90 संवेदनशील जगहें चिन्हित की थीं। इसके बावजूद पहली ही तेज बारिश में ये सारे इंतजाम धराशायी हो गए। बारिश का पानी और ओवरफ्लो होता सीवर सडक़ों पर एक हो गया। कई इलाकों में पीने के पानी में सीवर का पानी मिक्स होने की शिकायतें आ रही हैं। ट्रैफिक पूरी तरह थम गया और लोगों का घंटों तक सडक़ों पर निकलना दुश्वार हो गया। उन्होंने कहा कि ड्रेनेज की सफाई, नालों के निर्माण और मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। जनता पूछ रही है कि जब हर बारिश में शहर डूबता ही है, तो यह जनता की कमाई का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? क्या नगर निगम और जीएमडीए के अधिकारी पूरी तरह सोए हुए हैं? इतने बुरे हालात पैदा होने के बावजूद आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? किसी गैर-जिम्मेदार अधिकारी का इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया? मनीष यादव ने कहा कि हर बार मानसून से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश होती है, साइबर सिटी नारकीय स्थिति में तब्दील हो जाती है। न तो शहर में साफ-सफाई की कोई उचित व्यवस्था है और न ही जलनिकासी का कोई ठोस इंतजाम। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि जनभावना का सम्मान करते हुए जलनिकासी की पूर्ण व्यवस्था की जाए और सीवरों व ड्रेनेज सिस्टमों को दुरुस्त किया जाए।
हर बार पानी में बह जाते हैं सरकार व प्रशासन के जलनिकासी के दावे : मनीष यादव

