गुरुग्राम। भारतीय संविधान केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यदि समय, इतिहास और राष्ट्रीय हित की आवश्यकता हो, तो देश के संघ में नए राज्यों के प्रवेश अथवा नए राज्यों की स्थापना का संवैधानिक मार्ग भी प्रदान करता है। वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 में बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 2 देश की संसद को यह विशेष शक्ति प्रदान करता है कि वह कानून बनाकर भारत के संघ में नए राज्यों को प्रवेश दे सकती है या नए राज्यों की स्थापना कर सकती है। संसद इस शक्ति का प्रयोग अपने विवेक से तथा उचित शर्तों और नियमों के अधीन करती है। संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता दिखाते हुए यह प्रावधान किया था ताकि भविष्य में राष्ट्रीय हित या बदलती परिस्थितियों के अनुसार यदि किसी बाहरी क्षेत्र को भारत संघ में शामिल करना हो, तो उसका एक सुदृढ़ संवैधानिक आधार उपलब्ध रहे।
क्या अंतर है अनुच्छेद 2 और 3 में
एडवोकेट कैलाश चंद ने नागरिकों के एक बड़े भ्रम को दूर करते हुए अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के बीच का अंतर स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 2 मुख्यत: उन परिस्थितियों से संबंधित है, जहाँ भारत के बाहर के किसी भौगोलिक क्षेत्र को भारत संघ में शामिल करना हो या नए राज्य के रूप में स्थापित करना हो। अनुच्छेद 3 देश की वर्तमान सीमाओं के भीतर स्थित राज्यों के पुनर्गठन, विभाजन, दो राज्यों के विलय, उनकी सीमाओं में बदलाव या नाम परिवर्तन से संबंधित है। उन्होंने कहा कि इन दोनों अनुच्छेदों का संयुक्त उद्देश्य यही है कि भारत की संघीय व्यवस्था समय के साथ संवैधानिक रूप से विकसित होती रहे।
देश के हित में संसद की भूमिका है सर्वोच्च
उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 2 के तहत अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल और केवल देश की संसद के पास है। संसद राष्ट्रीय सुरक्षा, जनहित, प्रशासनिक सुविधा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही कोई कानून बनाती है। इससे यह साफ होता है कि भारत की क्षेत्रीय संरचना में किसी भी बदलाव का आधार केवल संविधान और संसद की विधायी प्रक्रिया ही हो सकती है।
नागरिकों के लिए संदेश और निष्कर्ष
कैलाश चंद एडवोकेट ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को यह समझना चाहिए कि हमारा संविधान प्रगतिशील है और बदलाव का विरोध नहीं करता। लेकिन, हर परिवर्तन देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादा के भीतर ही होना चाहिए। चूंकि अनुच्छेद 2 और 3 एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं, इसलिए इस ज्ञानवर्धक श्रृंखला के अगले अध्याय में अनुच्छेद 3 पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 और 3 के बीच अंतर को वरिष्ठ अधिवक्ता ने किया स्पष्ट

