गुरुग्राम। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने न्यायालय परिसर में कोर्ट नंबर 3 और 4 के सामने बने रैंप को ठेकेदार द्वारा तोड़े जाने और अधिवक्ताओं के बैठने के हॉल संख्या 1, 2 व 3 को लंबे समय से बंद रखे जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस लापरवाही के खिलाफ प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने बताया कि गत 24 मई को गुरुग्राम न्यायालय के रिकॉर्ड रूम में लगी भीषण आग के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से का मलबा हटाने का काम चल रहा था। लेकिन इस कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा कोर्ट नंबर 3 और 4 के सामने बने उस रैंप को भी तोड़ दिया गया, जहाँ से कोई मलबा हटाया ही नहीं जाना था। उन्होंने कहा कि यह रैंप वकीलों, बुजुर्गों, आम वादकारियों और विशेषकर दिव्यांगजनों के सुगम आवागमन के लिए बनाया गया था। बिना किसी स्पष्ट आवश्यकता के इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधा को क्षतिग्रस्त करना पूरी तरह अनुचित है। प्रशासन स्पष्ट करे कि यह रैंप किसके आदेश पर तोड़ा गया और इसका पुनर्निर्माण कब तक कराया जाएगा? संतोख सिंह ने अधिवक्ताओं की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना के बाद से अधिवक्ताओं के बैठने के लिए निर्धारित हॉल संख्या 1, 2 और 3 को भी बंद कर दिया गया है। पिछले एक महीने से अधिक समय से ये हॉल बंद पड़े हैं। इसके कारण 1500 से अधिक अधिवक्ताओं के बैठने की जगह छिन गई है, जिससे मुवक्किलों से परामर्श करने, मुकदमों की तैयारी और दैनिक न्यायिक कार्यों के संचालन में भारी कठिनाई आ रही है। अधिवक्ताओं को बैठने की जगह न मिलने का सीधा प्रतिकूल प्रभाव न्याय व्यवस्था की कार्यकुशलता पर पड़ रहा है। हालांकि अदालतों में ग्रीष्मावकाश चल रहा है। पूर्व बार प्रधान ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि अधिवक्ताओं के हितों और न्यायिक कार्यों की निरंतरता को देखते हुए हॉल संख्या 1, 2 और 3 को तत्काल प्रभाव से खोला जाए। न्यायालय परिसर में किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान आम नागरिकों और अधिवक्ताओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक संपत्तियों को बिना वजह नुकसान पहुँचाया जाना चाहिए।
जिला न्यायालय में रैंप तोड़े जाने और अधिवक्ता हॉल बंद रहने पर अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल

