NCRNewsअध्यात्मअर्थव्यवस्थादेशबिज़नेसराजनीतिराज्य

खील-बतासे का बड़ा महत्व है मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना में, इसके हैं ज्योतिषीय कारण भी : डा. मनोज शर्मा

गुरुग्राम। दीपावली का त्यौहार घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद जब रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे तो इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था। तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाता आ रहा है।
लक्ष्मी पूजन
दीपावली के दिन हर घर में लक्ष्मी पूजन किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं, जिनके स्वागत के लिए हर कोई अपने घर को रोशनी से सजाता है। लक्ष्मी पूजन खील-बतासे से की जाती है। लक्ष्मी की पूजा खील-बतासों से ही क्यों की जाता है, यह भी एक बड़ा कारण है?
खील का है बड़ा महत्व
जानकारों का कहना है कि लक्ष्मी पूजन में खील का बड़ा महत्व है। खील धान से बनती है, जो चावल का ही एक रुप है। इसका तात्पर्य यह है कि खील चावल से बनती है। दीपावली आने से कुछ समय पहले चावल की फसल तैयार होती है। मां लक्ष्मी को इस फसल से पहले भोग के रुप के खील-बतासे चढ़ाए जाते हैं। इसीलिए खील का बड़ा महत्व है।
ज्योतिषिय कारण भी है इसका
ज्योतिषाचार्य डा. पंडित मनोज शर्मा का कहना है कि खील-बतासे से महालक्ष्मी की पूजा करने के पीछे ज्योतिषीय कारण भी है। दीपावली का त्यौहार धन और वैभव का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषियों का कहना है कि हिंदू धर्म में धन और वैभव का देवता शुक्र विग्रह को माना जाता है। सफेद और मीठी चीजें शुक्र का प्रतीक मानी जाती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का शुक्र कमजोर है तो वह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करके भी शुक्र को अपने अनुरुप कर सकता है। राशि में बैठे शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए मां लक्ष्मी को खील-बतासे का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
9