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शिक्षक दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ के 2 दिवसीय सम्मेलन में जुटे शिक्षाविद

गुरुग्राम। धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी के बिलासपुरं स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) में शिक्षक दिवस के अवसर पर द पॉवर ऑफ नाउ विषय पर 2 दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षाविद सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा शिक्षाविद शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक चेतना और आधुनिक तकनीकों के संतुलन पर विचार-मंथन करना रहा। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा ने कहा कि वर्तमान समय ही परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली क्षण है। समय बीत जाने पर सुधार का अवसर हाथ से निकल जाता है और केवल पश्चाताप शेष रह जाता है। उन्होंने बल दिया कि विद्यार्थियों को बाल्यावस्था से ही शांति और योग का महत्व समझाना आवश्यक है। शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों के समावेश से ही मानसिक रूप से स्वस्थ और सुसंस्कृत समाज की नींव रखी जा सकती है। हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.जे. राव ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल भौतिक समृद्धि पर केंद्रित है, जबकि शिक्षा का वास्तविक ध्येय व्यक्ति का आंतरिक और आध्यात्मिक विकास करना है। भारत संपूर्ण विश्व में आध्यात्मिक चेतना का संवाहक है। एमडीआई के प्रो. अरविंद सहाय ने कहा कि एआई के अत्यधिक उपयोग से छात्रों के मस्तिष्क का स्वाभाविक विकास थम रहा है। सीखने की प्रक्रिया को जीवंत रखने के लिए मानसिक व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। आईआईएलएम विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के निदेशक डॉ. ए. वडिवेल ने कहा कि  सोशल मीडिया के दौर में शिक्षकों की शांत और सकारात्मक मन:स्थिति ही विद्यार्थियों में विश्वास और समानुभूति का संचार कर सकती है। आयोजन को जीडी गोयनका विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राज सिंह, एमिटी विश्वविद्यालय के निदेशक संजय झा, इग्रू के सहायक क्षेत्रीय निदेशक प्रो. कमलेश मीणा, बीके बिंदू, बीके सुमन आदि ने भी संबोधित किया।