गुरुग्राम। आधुनिक दौर की आपाधापी और भागदौड़ भरी जीवनशैली में निरंतर असंतुलित भागता मन आज तनाव और अवसाद का मुख्य कारण बनता जा रहा है। संसार की सबसे अद्भुत और असीम शक्ति मन है। मानव इतिहास के बड़े से बड़े आविष्कार मन की इसी एकाग्र शक्ति से संभव हुए हैं। लेकिन आज बाह्य प्रभावों के कारण नकारात्मक और व्यर्थ विचार मन की ऊर्जा को नष्ट कर रहे हैं। उक्त विचार ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा ने धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज द्वारा जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओआरसी परिसर में रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में ओवरकमिंग ओवरथिंकिंग विषय पर आयोजित समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मन एक छोटे बच्चे की भांति है—इसे दबाने के बजाय प्यार और समझ से ही सही दिशा में चलाया जा सकता है। बीती बातों का बार-बार चिंतन करने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें और जीवन में निमित्त भाव धारण करें। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके गोपी ने अत्यधिक सोच के मनोवैज्ञानिक कारणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अत्यधिक सोचने की जड़ में अभिमान और अपमान की भावना छिपी होती है। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित एक विशेष पैनल डिस्कशन में विषय के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई। जिसमें इंटरएक्टिव बीज कंपनी की निदेशक मोनिका गुप्ता, वित्तीय सलाहकार जतिन दुरेजा, बीके हुसैन एवं बीके प्रीति मदान ने अपने विचार रखे। पैनलिस्टों ने सर्वसम्मति से माना कि अत्यधिक सोच का सबसे बड़ा कारण असफल होने का भय है। राजयोग के अभ्यास और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से मन को शक्तिशाली बनाकर इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है। सफल मंच संचालन बीके फाल्गुनी द्वारा किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में राजयोग और सकारात्मकता को उतारने का संकल्प कराया गया।
व्यर्थ विचारों से मन की ऊर्जा बचाना ही है मानसिक शांति की कुंजी : बीके आशा

