गुरुग्राम। गुरुग्राम और नूँह क्षेत्र में बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारियों को लेकर हरियाणा में विरोध की लहर तेज हो गई है। आम जनता, बिजली कर्मचारी और उपभोक्ता संगठनों ने सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध करते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) को निजीकरण के संकट से बचाने की मांग की है। समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी हरियाणा के अध्यक्ष मनीष यादव ने कहा कि किसी भी सेक्टर का निजीकरण केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की नीयत से किया जाता है। निजी कंपनियों के आते ही बिजली की दरें बेतहाशा बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या सरकार राज्य के सफल बिजली ढाँचे और डीएचबीवीएन को सही तरीके से चलाने में असमर्थ साबित हो रही है? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नियामक आयोग के इस कदम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी और अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दर्ज कराएगी। डीएचबीवीएन की संपत्ति और बुनियादी ढांचा जनता के टैक्स के पैसे से बना है। यदि इस व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपा गया, तो जनता का भारी नुकसान होगा। विरोध कर रहे संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत नहीं रोका गया, तो पूरे प्रदेश में व्यापक जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण होने से बिजली की दरों में होगी वृद्धि : मनीष यादव

