देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टॉफ ने केशवपुरम में डीटीसी बस चालक की उसी की कार में अगवा कर हत्या और भलस्वा डेयरी के ऑटो चालक की अलीपुर में ले जाकर हत्या करने के मामले में आरोपी भाई-बहन को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से कार की चाभी और डीटीसी चालक का मोबाइल फोन मिला है। बताया जा रहा है कि आरोपी पकड़े नहीं जाते तो दोनों इस अवधि में दिल्ली में तीन से चार वारदात को अंजाम दे देते। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि दोनों वारदात में लड़की ने लिफ्ट मांगी और भाई के साथ चालकों को गला घोंटकर मार डाला। हत्या के बाद दोनों मोबाइल फोन, सोने के गहने और नकदी लेकर फरार हो गए थे।
बाहरी उत्तरी जिले के डीसीपी गौरव शर्मा के मुताबिक, आरोपितों की पहचान शिव कुमार और नीलम के रूप में हुई है। दोनों घटनाओं में पहचान छिपाने के लिए आरोपितों ने चालकों की हत्या की। पुलिस के अनुसार 12 फरवरी की सुबह रामजनपुरा गांव अलीपुर में संजय नामक ऑटो चालक का शव पड़ा मिला था। संजय भलस्वा डेयरी में परिवार के साथ रहता था। 14 फरवरी की रात से लापता प्रीतम सिंह चौहान का शव अगले दिन शाम को सोनीपत टीडीआई मॉल के पास गड्ढे में मिला था।
उसकी कार बख्तावरपुर तालाब के पास लावारिस मिली थी। प्रीतम की सोने की अंगूठी और मोबाइल फोन गायब था। स्पेशल स्टॉफ के इंस्पेक्टर अजय कुमार की देखरेख में जांच टीम ने करीब 40 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की।
इस बीच पुलिस ने पुख्ता सूचना पर आरोपित भाई-बहन को बख्तावरपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों से पूछताछ करने पर पता चला कि नीलम ने कुछ समय पहले ही अपने पति से तलाक लिया था। हनीट्रैप जैसा तरीका दोनों के पास आर्थिक तंगी थी। दोनों ने हनीट्रैप की तरह वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। प्रीतम सिंह हत्या मामले में नीलम ने मधुबन चौक से प्रीतम से कार में लिफ्ट ली। इसके बाद उसने अपने भाई को भी बैठा लिया था। अलीपुर से पहले नीलम कार में अचानक ड्राइविंग सीट के बराबर वाली सीट पर आकर बैठ गई थी। अलीपुर गांव में प्रीतम से लूट की कोशिश की।
पीछे से उसके भाई ने तार से उसका गला घोट दिया। एक दिन पहले ही उन्होंने अलीपुर में संजय ऑटो चालक की हत्या कर शव फेंका था। वह इस बार शव को दिल्ली से बाहर फेंकना चाहते थे। शिव कुमार कार को टीडीआई मॉल ले गया। वहां शव को फेंक दिया। इस बीच उनकी कार का टायर पंचर हो गया। वहीं पर उन्होंने टायर बदला। प्रीतम के पास से नकदी ज्यादा नहीं मिली थी। उनको वापस घर भी आना था। लाश को ठिकाने लगाकर कार से बख्तावरपुर आए और कार खड़ी कर घर चले गए।


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