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द्रोपदी चीर हरण की कथा सुनकर श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

गुरुग्राम। सैक्टर 82 स्थित मैक्सको कासाबेला सोसायटी परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक ने विभिन्न प्रसंगों का संगीतमय शैली मे ंवर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक आचार्य गोपाल कृष्ण महाराज ने द्रौपदी चीर हरण, आचार्य शुकदेव का आगमन आदि प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महाभारत में द्रौपदी चीर हरण एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग है, जो द्यूत क्रीड़ा यानि कि जूए में पांडवों द्वारा द्रौपदी को हारने के बाद भरी सभा में घटित हुआ। दुर्योधन के आदेश पर दुशासन द्वारा अपमानित किए जाने पर, द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा और भगवान ने साड़ी यानि कि चीर बढ़ाकर उसकी लाज बचाई। जब सभी सहारे समाप्त हो जाते हैं, तब सच्चे मन से की गई प्रभु की पुकार अवश्य सुनी जाती है। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। आरडब्ल्यूए के प्रधान राजेश मित्तल का कहना है कि कथावाचक ने कथा में बुआ कुंती द्वारा मांगे गए अनोखे वरदान, आचार्य शुकदेव जी के आगमन प्रसंग का भी वर्णन किया गया। कथा के समापन पर भव्य आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रसाद भी वितरित किया गया। कथा श्रवण करने के लिए प्रवीण जैन, चंद्रशेखर सिंघल, नरेश जिंदल, विजय गुप्ता, अशोक अग्रवाल, अमरीश गुप्ता, मुकेश गुप्ता, योगेंद्र आर्य, अनिल सतीजा, अजय बिंदल, विनय गौतम, शिव गौतम, अंकित जैन, पुनीत जैन, कमला प्रसाद, पेंद्र भारद्वाज, अरुण सक्सेना, सत्येंद्र सिंह, अर्जुन फौजदार, मालती शर्मा, शिखा अग्रवाल, सुनीता मित्तल, पदमा सिंघल, मंजू जैन, अंजू जिंदल, मोना दीप जैन, निधि, मधु फौजदार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।