गुडग़ांव, उद्यमियों का
प्रतिनिधित्व करने वाली एनसीआर
चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष एचपी यादव का कहना है कि
प्रदेश सरकार के अधिकारी द्वारा दिए गए धमकी भरे बयान से उद्यमियों में
इस बात की आशंका व्याप्त हो गई है कि औद्योगिक इकाईयों को खोलने के बाद
अगर किसी कर्मी में कोरोना पॉजिटिव पाया गया तो उसके लिए उद्यमियों को ही
जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस का अनावश्यक हस्तक्षेप
बढ़ेगा। उद्योग चलाने बेहद मुश्किल हो जाएंगे। प्रबंधन अनावश्यक ही
डिजास्टर मैनेजमेंट कानून की शिकार बन जाएगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से
आग्रह किया है कि इस मामले में सरकार को तत्काल संज्ञान लेने की जरुरत
है, ताकि वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सके। उनका ये भी कहना है कि जिला प्रशासन
और एसोसिएशन के साथ बैठक का आयोजन किया गया था। इसी बैठक में उद्यमियों
के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज करने की बात कही गई थी, जो व्यवहारिक दृष्टिकोण
का परिचायक नहीं है। इस प्रकार की कार्यवाही से अधिकांश उद्यमियों ने
अपनी इंडस्ट्री को पुन: खोलने से मना कर दिया है। इससे जहां बड़ी संख्या
में श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे, वहीं प्रदेश को भी भारी राजस्व की हानि
का सामना करना पड़ेगा। उद्योग जगत लगातार आर्थिक राहत पैकेज की मांग करता
आ रहा है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करते हुए जिला प्रशासन को उद्यमियों
से तालमेल स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने के निर्देश जारी करने
चाहिए।

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