गुरुग्राम। कार्तिक माह की नवमी तिथि पर शुक्रवार को आंवला नवमी का पर्व महिलाओं ने धूमधाम से मनाया। इस नवमी को आंवला नवमी व अक्षय नवमी के रुप में भी जाना जाता है। द्वापर युग की शुरुआत कार्तिक शुक्ल नवमी को हुई थी,यह युगादि तिथि है। महिलाओं ने दैनिक कार्यों से निवृत होकर आंवला का पूजन भी पूरे विधि-विधान के अनुसार किया। पूजा में आंवले की जड़, पुष्प, गंध आदि से पूजा-अर्चना करें कर 7 परिक्रमा कर दीप प्रज्जवलित भी किया। उसके बाद परिवार की वृद्ध महिलाओं से कथा का श्रवण भी किया। यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भारतीय संस्कृति का पर्व है। क्योंकि आंवला पूजन पर्यावरण के महत्व को भी दर्शाता है और इस पर्व के माध्यम से आमजन को भी पर्यावरण के प्रति जागरुक किया जाता है। प्रदूषण से स्वास्थ्य को खतरा होता है। आंवले के वृक्ष का पूजन कर परिवार के आरोग्य व सुख-समृद्धि की महिला श्रद्धालुओं ने कामना भी की। धार्मिक ग्रंथों में भी है बड़ा महत्व पद्मपुराण के अनुसार यह पवित्र फल भगवान श्री विष्णु को प्रसन्न करने वाला व शुभ माना गया है। इसके भक्षण मात्र से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाते हैं। आंवले का सेवन करने मात्र से जहां स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है, वहीं आंवले के सेवन से आयु भी बढ़ती है और सभी पापों से मुक्ति भी मिल जाती है। कहा जाता है कि जहां आंवले का फल मौजूद होता है, वहां भगवान श्रीविष्णु सदा विराजमान होते हैं और उस घर में ब्रह्मा एवं सुस्थिर लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए अपने घर में आंवला अवश्य रखना चाहिए। शहर के विभिन्न मंदिर परिसरों में आंवले की पूजा-अर्चना व परिक्रमा करती महिला श्रद्धालु दिखाई दी।
आंवला वृक्ष की पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने धूमधाम से मनाई आंवला नवमी

