गुडग़ांव: हरियाणा प्रदेश के सैनिकों ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। आज भी प्रदेश के अनेक जवान सेना में
अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के मध्य हुए युद्ध में भारतीय नौसेना के सैन्य अधिकारी कोमोडोर बबरूभान यादव ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया था। अपने अदम्य शौर्य के कारण उन्हें महावीर चक्र से विभूषित किया गया था। वक्ताओं ने उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए कहा कि महावीर चक्र विजेता कोमोडोर बबरुभान यादव का जन्म 14 सितंबर 1928 में रेवाडी के गांव भाडावास में मेजर भगवान सिंह के घर हुआ था।
वर्ष 1949 में उन्होंने भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने अपने शौर्य से पाकिस्तान के कराची शहर को दहला दिया था। इसलिए उन्हें किलर ऑफ़ कराची भी कहा गया। उनके पिता मेजर भगवान सिंह यादव एमबीई थे, जिन्होंने दोनों विश्व-युद्धों में भाग लिया था। उनके बड़े भाई साहब मेजर महेंद्र सिंह यादव भारतीय सेना में मेजर रहे। वक्ताओं ने कहा कि 4 दिसंबर 1971 की रात को भारत-पाक युद्ध के दौरान मिसाइल बोट की कमांड संभालते हुए बबरूभान यादव ने कराची बंदरगाह के नजदीक पाकिस्तान के तीन युद्ध पोतों को बर्बाद कर डूबो दिया। बहादुरी एवं कर्तव्य परायणता के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार महावीर चक्र से उन्हें नवाजा गया, जो भारतीय नौसेना के लिए पहला पदक था। जनवरी 2010 को इस बहादुर सपूत का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। गुरुग्राम बस स्टैंड से दिल्ली बॉर्डर डुंडाहेड़ा तक के रोड का नामकरण बबरूभान यादव के नाम पर किया गया है।

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