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धर्म व दर्शन के सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों में से एक थे डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : प्रो. सपरा


गुडग़ांव। देश की आजादी के 75वीं वर्षगांठ को पूरा देश आजादी के अमृत महोत्सव के रुप में मना रहा है। जिसमें देश के महान क्रांतिकारियों, बलिदानियों, स्वतंत्रता सेनानियों व राजनेताओं को याद कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सोमवार को देश के प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक द्वितीय राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया।

शिक्षाविद प्रो. सुभाष सपरा ने कहा कि डा. राधाकृष्णन देश के प्रथम उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनके इन्हीं गुणों के कारण सन् 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था। उनका जन्म वर्ष 1888 की 5 सितम्बर को मद्रास के तिरूत्तनी गांव में हुआ था। उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। 20वीं सदी में तुलनात्मक धर्म व दर्शन के सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों में से वे एक थे। उन्हें भारत की संविधान सभा के लिए भी चुना गया था। प्रो. सपरा ने कहा कि उनका मानना था कि शिक्षक देश में सबसे बुद्धिमान होने चाहिए, ताकि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकें और वे एक सभ्य नागरिक बन सकें।

डा. राधाकृष्णन ने विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का भी अध्ययन किया था। भारतीय संस्कृति के नैतिक मूल्यों से देशवासियों को अवगत कराने में उन्होंने अपना पूरा योगदान दिया। डा. राधाकृष्णन समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। प्रो. सपरा ने कहा कि डा. राधाकृष्णन को यही सच्ची श्रद्धाजलि होगी कि उनके दिखाए मार्ग पर देशवासी चलें ताकि भारत देश का नाम विश्व में रोशन हो सके।

Comments (1)

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