गुडग़ांव। महापण्डित राहुल सांकृत्यायन हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है। वह एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद थे और 20वीं सदी के पूर्वार्ध में उन्होंने यात्रा वृतांत तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान किए। बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिन्दी साहित्य में युगान्तरकारी माना जाता है। उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए साहित्यकार डा. घमंडीलाल अग्रवाल ने कहा कि उनका जन्म 9 अप्रैल 1893 को उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के पन्दहा गांव में हुआ था। बाल्यकाल से ही उन्होंने उर्दू का ज्ञान भी प्राप्त किया था। उन्होंने वाराणसी व कलकत्ता प्रवास के दौरान भी संस्कृत का अध्ययन किया। लाहौर में उन्होंने मिशनरी का कार्य भी किया था। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया। जिसके कारण उन्हें जेल यात्रा भी करनी पड़ी। अंग्रेजों के बढ़ते दबाव के कारण वह कई वर्षों तक भूमिगत भी रहे।
डा. अग्रवाल ने कहा कि किसान मजदूरों के आंदोलन में भी उनका बड़ा योगदान रहा। उन्होंने श्रीलंका, नेपाल व रुस की यात्राएं भी की। उन्होंने प्राचीन विषयों का अध्ययन करने के लिए देश-देशांतरों की अधिक से अधिक प्रत्यक्ष जानकारी भी प्राप्त की। उन्हें साहित्यकार के साथ-साथ महान पर्यटक भी माना जाता है। 14 अप्रैल 1963 को 70 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था। डा. अग्रवाल ने साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों से आग्रह किया कि राहुल सांकृत्यायन के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें, उनको सफलता अवश्य मिलेगी।


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