गुडग़ांव। प्रख्यात उर्दू कवि, उपन्यासकार व लघुकथा लेखकर कश्मीरी लाल ज़ाकिर की जयंती पर उन्हें याद करते हुए शिक्षाविद् प्रो. सुभाष सपरा ने कहा कि कश्मीरी लाल हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक भी थे। भारत ही नहीं अपितु पाकिस्तान में भी उनकी रचनाएं लोकप्रिय हुई हैं। हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों अंबाला, करनाल, पंचकूला, चंडीगढ़, पटियाला, गुरुग्राम आदि की अखिल भारतीय उर्दू मुशायरों की परंपरा के सूत्रधार कश्मीरी लाल ज़ाकिर ही हुआ करते थे। उनका जन्म 7 अप्रैल 1919 को वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था। वह अंग्रेज़ी और शिक्षा में स्नातकोत्तर थे। उन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी में 100 से ज़्यादा किताबें लिखीं। उनकी रचनाएं उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं।
प्रो. सपरा ने कहा कि उन्होंने 8 दशक तक उर्दू और हिंदी साहित्य को अपना योगदान दिया। वह लगभग तीन दशक तक हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक पद पर रहे। ज़ाकिर लम्बी अवधि तक हरियाणा के शिक्षा विभाग और बाद में चंडीगढ़ प्रशासन के शिक्षा विभाग में सेवारत भी रहे। उनके उपन्यास करमांवाली पर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने 100 से ज्यादा नाटकों का मंचन किया। खेले। बाद में इसी पर दूरदर्शन ने भी धारावाहिक बनाया था। साहित्य के क्षेत्र भी उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा राष्ट्रीय ग़ालिब पुरस्कार, शिरोमणि साहित्यकार सम्मान, एनएलएम यूनेस्को, साहिर लुधियानवी और फख्र-ए-हरियाणा जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका नि धन 97 वर्ष की अवस्था में 31 अगस्त 2016 को चंडीगढ़ में हो गया था। प्रो. सपरा ने साहित्य के क्षेत्र में प्रयासरत युवाओं से आग्रह किया कि वे कश्मीरीलाल से प्रेरणा लेकर अपने क्षेत्र में आगे बढक़र उनका नाम रोशन करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


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