गुरुग्राम अफगानिस्तान में जो हालात हो रहे हैं, उनका
असर विश्व के अन्य देशों पर भी किसी न किसी रुप में अवश्य ही पड़ेगा, ऐसा
कूटनीतिज्ञों का मानना है। भारत सरकार भी इन हालातों को लेकर जहां सतर्क
है, वहीं सभी राजनैतिक दलों की सर्वदलीय बैठक वीरवार को बुलाई है। उद्योग
जगत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। उद्यमियों का कहना है कि देश में सूखे
मेवे का आयात अफगानिस्तान से बड़े स्तर पर किया जाता रहा है और कपास,
कॉफी व चाय की पत्ती का निर्यात भी अफगानिस्तान को होता रहा है। लेकिन
तालिबान के हाथ में सत्ता आ जाने के बाद वहां का औद्योगिक व कारोबारी
भविष्य क्या होगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। तालिबान देश के
साथ-साथ व्यापारिक संबंध रखेगा या नहीं, कुछ नहीं कहा जा सकता।
निर्यातकों का काफी पैसा फंसा हुआ भी है। उन्हें भय सता रहा है कि कहीं
उनका पैसा फंस न जाए। उद्यमियों का प्रतिनिधित्व करने वाली गुडग़ांव
उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण यादव का कहना है कि अफगानिस्तान में
कपास का निर्यात करने वालों के लिए हालात अच्छे नहीं हैं। उनका मानना है
कि उनका भुगतान वहां फंस सकता है। दीपावली का त्यौहार भी 2 माह बाद आने
वाला है। दीपावली पर सूखे मेवे का कारोबार अधिक होता है। दीपावली से
पूर्व ही सूखे मेवे की व्यवस्था करनी होती है। क्योंकि दीपावली पर मेवे
की खरीद अधिक होती है। लेकिन अफगानिस्तान में हालात ठीक न होने के कारण
सूखे मेवे का कारोबार भी प्रभावित होगा। अफगानिस्तान में राजनैतिक
अस्थिरता के कारण वहां से होने वाले आयात पर भी असर पडऩे लगा है। स्थिति
कब सामान्य होगी यह नहीं कहा जा सकता। दीपावली पर कारोबार भी अवश्य
प्रभावित होगा। देश में अखरोट, बादाम, किशमिश, पिस्ते पर महंगाई की भारी
मार पड़ेगी।

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