गुरुग्राम, कोरोना की दूसरी लहर ने हर आयु वर्ग को प्रभावित
किया है। इस दूसरी लहर में कई प्रदेशों में विभिन्न आयु वर्ग के बच्चे भी
प्रभावित हुए बताए जा रहे हैं। अब कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका
भी व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यह तीसरी लहर बच्चों के
लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। उनका मानना है कि कुपोषण के शिकार
बच्चों को कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा हो सकता है। चिकित्सक भी ऐसे
बच्चों को पोषक तत्व युक्त खाना देने व उनकी रोग के प्रति प्रतिरोधक
क्षमता बढ़ाने का आग्रह भी कर रहे हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने बच्चों
को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात किया हुआ है।
ये कार्यकर्ता समय-समय पर जहां बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं,
वहीं उन्हें समय-समय पर दूध व अन्य पौष्टिक आहार भी उपलब्ध करा रही हैं।
जिले में 2500 से अधिक कुपोषण के शिकार बच्चे बताए जाते हैं। विशेषज्ञों
का मानना है कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का खान-पान कमजोर होता है।
ऐसे में उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है और ऐसे बच्चों को
ही कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है। प्रदेश का महिला एवं बाल विकास
विभाग ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके परिजनों को सभी आवश्यक सुविधाएं भी
उपलब्ध कराने में जुटा है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बच्चों को
कुपोषण से बचाना होगा, ताकि वे कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से बच
सकें। इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास भी करने होंगे।

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