गुडग़ांव, कोरोना महामारी के दौर में पॉजिटिव या सकारात्मक
सोच जरुरी
है। इस सकारात्मक सोच के रहते इस महामारी का सामना किया जा
सकता है। कोरोना
के कारण आमजन में डर व नकारात्मकता व्याप्त होने का
अंदेशा हो
रहा है। इस दौर में नकारात्मकता को अपने पास फटकने भी नहीं
देना चाहिए।
आत्मिक शक्ति के माध्यम से सकारात्मक सोच को अपने भीतर
बढ़ाया जा
सकता है। यह बात धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज की मोटिवेशन
स्पीकर बीके
शिवानी ने ऑनलाइन आयोजित बेविनार में कही। उनका कहना है कि
कोरोना वायरस
ने भारत को ही नहीं, अपितु विश्व की महाशक्तियों तक को
हिलाकर रख
दिया है। समाज विकृत होकर अंधी दौड़ में दौड़ता जा रहा है।
समाज में जो
संवेदना पहले थी, उनमें कमी देखी जा रही है। इस कमी को हम
सभी को सामूहिक
रुप से प्रयास कर पूरा करना होगा। शिवानी का कहना है कि
हर कोई सोचता
है। यह सोचने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। यह बात अलग
है कि कोई
कम सोचता है तो कोई अधिक, लेकिन सोचते सभी अवश्य हैं। कोई भी
क्षण ऐसा नहीं
होता, जब हम न सोचतेे हों। उन्होंने कोरोना वायरस का जिक्र
करते हुए कहा
कि हमारा मन जीवन की नींव है। नीवं मजबूत होनी चाहिए। शरीर
को स्वस्थ
रखने के लिए सभी परिश्रम करते हैं। परिस्थितियां आती रहती हैं
उनका मुकाबला
करना चाहिए। जो परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं हैं,
यानि कि वे
हमारे नियंत्रण से बाहर हैं उनका अफसोस नहीं करना चाहिए।
कोरोना भी
ऐसी ही परिस्थिति है। कोरोना से सरकार व जिला प्रशासन द्वारा
जारी किए गए
दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इससे बचा जा सकता है।
कोरोना रुपी
परिस्थिति शहर या देश के लिए नहीं, अपितु पूरे विश्व की
परिस्थिति
बनी हुई है। उन्होंने फिर दोहराते हुए कहा कि आत्मिक शक्ति के
माध्यम से
अपनी सोच सकारात्मक रखें, कोरोना से जल्दी ही निजात मिल जाएगी
और फिर पहले
जैसे हालात हो जाएंगे।

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