गुडग़ांव, वैश्विक कोरोना महामारी के प्रकोप से लोगों को
बचाने के लिए
सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है, जिनमें से लॉकडाउन भी एक
मुख्य कदम
है। 2 चरणों में घोषित किए लॉकडाउन का प्रभाव ही है कि इस
महामारी से
अधिक लोग प्रभावित नहीं हो सके। सरकार ने जो तीसरा लॉकडाउन
घोषित किया
है, इसमें कुछ आवश्यक शर्तों के साथ राहत भी दी है। इन राहतों
का दुरुपयोग
नहीं करना चाहिए। यह कहना है सामाजिक संस्था मंथन आई
हैल्थकेयर
फाउण्डेशन के संस्थापक गीता ज्ञानेश्वर डा. स्वामी दिव्याानंद
महाराज का।
जो उन्होंने जरुरतमंद लोगों को खाद्य सामग्री वितरित करते हुए
कही। उन्होंने
उदाहरण देते हुए कहा कि कुए में अपनी परछाई देखकर उससे
खेलने की इच्छा
से एक बच्चा कुए में भी छलांग लगाने की जिद करता है। क्या
कोई समझदार
माता-पिता उसे कुए में तो नहीं धकेल देंगे। इस विपत्ति में तो
जीवन बचा रहे
यही बहुत बड़ी बात है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग शराब आदि की
बिक्री की
प्रतीक्षा हरियाणा में कर रहे हैं। गत दिवस दिल्ली व अन्य
प्रदेशों में
शराब की बिक्री पर क्या हंगामा हुआ, यह देश ने ही नहीं,
अपितु पूरे
विश्व ने देखा। क्या यही हमारी दृढ इच्छाशक्ति है? सामाजिक
दूरी की पूरी
अवहेलना की गई। 40 दिन का लगाया गया लॉकडाउन को धता बताते
हुए लोग शराब
खरीदने के लिए लाइनों में लग गए। इस सबसे कोरोना को बढ़ावा
ही मिलेगा।
उनका कहना है कि लोगों की बचकानी बुद्धि पर तरस आता है। जब वे
दुहाई देते
हैं कि होना तो वही है जो होना है या जहां जैसे जिसकी लिखी है
वहींं तो उसकी
मृत्यु आएगी। महाराज जी ने लोगों से आग्रह किया कि वे यदि
आज थोड़ा सा
विवेक से काम लेते हुए सयंम और मर्यादा में रहकर अपनी जिंदगी
सुरक्षित रख
लेते हैं तो सरकार व प्रशासन को सहयोग करने में हर्ज ही क्या
है। सादा खाओ
सादा पहनो, आफत न सिर पर आएगी और 4 दिन की जिंदगी आराम से
कट जाएगी।
विभिन्न क्षेत्रों में जरुरतमंदों को खाद्य सामग्री उपलब्ध
कराने का अभियान
संस्था के स्वयंसेवक पिछले एक माह से चलाते आ रहे हैं।

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