NCRNewsUncategorizedअध्यात्मअर्थव्यवस्थादेशबिज़नेसराजनीतिराज्य

नेत्रदान की प्रक्रिया है अत्यंत सरल, मात्र 15-20 मिनट में हो जाती है पूरी : स्वामी दिव्यानंद महाराज

गुरुग्राम। प्रत्येक वर्ष विश्व के विभिन्न देशों में नेत्रदान की महत्ता को समझते हुए 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है। इसके माध्यम से लोगों में नेत्रदान करने की जागरुकता फैलाई जाती है। विश्व दृष्टिदान दिवस का उद्देश्य नेत्रदान के महत्व के बारे में व्यापक पैमाने पर जन जागरूकता पैदा करना है तथा लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना है। नेत्र रोगों के निदान में जुटी मंथन आई हैल्थकेयर के संस्थापक डा. स्वामी दिव्यानंद महाराज का कहना है कि विकासशील देशों में प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक दृष्टिहीनता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कॉर्निया की बीमारियाँ मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद होने वाली दृष्टि हानि और अंधापन के प्रमुख कारणों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि आमजन को मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने की शपथ लेने के लिए भी विश्व नेत्रदान दिवस प्रेरित करता है ताकि दूसरों की अंधेरी दुनिया को रोशन करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा सके। महाराज जी का कहना है कि तमाम कोशिशों के बावजूद नेत्रदान करने वालों का आंकडा अधिक संतोषजनक नहीं है। देश में आज भी हजारों लोग अंधेरी दुनिया में जी रहे हैं। देश में प्रत्येक वर्ष 80 से 90 लाख लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन नेत्रदान 25 हजार के आसपास ही होता है। उनका कहना है कि एक व्यक्ति मृत्यु के पश्चात 4 लोगों की अंधेरी जिंदगी में उजाला बिखेर सकता है। पहले दोनों आंखों से 2 ही लोगों को कोर्निया मिल पाती थी, लेकिन नई तकनीक आने के बाद से एक आंख से 2 कोर्निया प्रत्यारोपित की जा रही है। व्यक्ति के मरने के बाद उसकी पूरी आंख नहीं बदली जाती, केवल रोशनी वाली काली पुतली ही ली जाती है। व्यक्ति की मृत्यु के 6 घंटे तक ही कार्निया प्रयोग में लाई जा सकती है। उनका यह भी कहना है कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल है और महज 15-20 मिनट में ही पूरी हो जाती है। उनका कहना है कि समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि आंखों की बीमारी का पता लग सके और समय रहते उनका उपचार किया जा सके।